चित्रकूट। कोषागार में हुए घोटाला में पूछताछ व जेल जाने से बचने के लिए जुगत लगे कई नामजद आरोपी पेंशनर व बिचौलियों को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। वजह, हाईकोर्ट में इनकी सुनवाई टल गई। उधर, जेल में बंद चार आरोपियों की जमानत याचिका जिला न्यायाधीश कोर्ट ने निरस्त कर दी।
शुक्रवार को एसआईटी के सामने आठ पेंशनर व उनके परिजन पहुंचे। टीम ने उनके कागजात व बैंक खाते से लेन देन का मिलान कर रुपये लेने और देने वालों के नाम पूछे। इस पर पेंशनरों ने कुछ अपने ही रिश्तेदार व कोषागार विभाग के अधिकारियों के नाम बताए। जिनके नाम बताए गए, वह दोनों विकास और अशोक जेल में हैं। अन्य नाम सामने आने पर उनकी तलाश के लिए पुलिस ने खोजबीन शुरू की है। एसआईटी प्रभारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा व जांच अधिकारी अजीत पांडेय ने बताया कि जांच में ज्यादा नया काम करने का मौका नहीं मिल रहा है। कोर्ट में कई कागजात प्रस्तुत करने में समय गुजर जाता है। इसके बावजूद शुक्रवार को जिन पेंशनरों से जानकारी मिली है, उसमें पेंशनरों के तीन बिचौलिये (जो पेंशनरों के रिश्तेदार भी हैं) के नाम सामने आए हैं। इनकी तलाश कर जेल भेजा जाएगा। दो विभागीय उन अधिकारियों के नाम आए हैं, जो जेल में हैं।
उधर, शुक्रवार को जेल जाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का सहारा ले रहे पेंशनरों व बिचौलियों को झटका लगा है। अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि जिला जज कोर्ट से चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। एक में अगली तारीख मिली है। इसके अलावा नामजद रिटायर्ड सहायक कोषाधिकारी अवधेश प्रताप सिंह समेत चार की गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका पर फिलहाल कोई सुनवाई नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार जेल में बंद छह आरोपियों की ओर से भी जमानत की याचिका कोर्ट में डाली गई है।
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