बदायूं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टैबलेट के बढ़ते उपयोग का सीधा असर अब लोगों की आंखों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 100 से 120 मरीजों में से लगभग 30 से 35 मरीज ऐसे होते हैं जो आंखों में जलन, सूखापन, दर्द, लालिमा और धुंधलापन जैसी समस्याओं की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन सभी मामलों के पीछे प्रमुख कारण डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक और लंबे समय तक उपयोग है।
लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा लगातार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित रखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। जिससे सिरदर्द, आंखों में भारीपन और दृष्टि धुंधली होने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। बच्चों और युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि उनका अधिकांश समय ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग और सोशल मीडिया पर बीत रहा है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ पीयूष मोहन अग्रवाल ने बताया कि कई मरीज देर रात तक मोबाइल देखने के कारण नींद की कमी से भी जूझ रहे हैं। जिससे आंखों की थकान और सूखापन और बढ़ जाता है। नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों के लिए विशेष रूप से हानिकारक होती है और यह धीरे-धीरे रेटिना को भी प्रभावित कर सकती है।
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ट्रिपल 20 के नियम को अपनाने की दी सलाह
-नेत्र रोग विशेषज्ञों ने लोगों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी है, यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें, ताकि आंखों को आराम मिल सके। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, पर्याप्त नींद लेने, मोबाइल की ब्राइटनेस कम रखने और जरूरत पड़ने पर ब्लू लाइट फिल्टर या चश्मे का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।