बस्ती। रोडवेज की बसें आजकल खाली दौड़ रही हैं। लांग रूट की बसों की हालत तो कुछ ठीक है। लेकिन लोकल रूट पर चलने वाली रोडवेज डिपो और अनुबंधित बसें खटारा हैं, जिससे यात्रियों को ठंड के दौरान यात्रा करने में परेशानी हो रही है। इसके चलते लोग सरकारी बसों के बजाय प्राइवेट टैक्सियों से यात्रा कर रहे हैं। इससे रोडवेज की आमदनी घट गई है।
बता दें कि निजी बसें सिर्फ लंबे रूट पर ही नहीं दौड़ रहीं, बल्कि लोकल मार्ग पर भी चलकर परिवहन निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहीं हैं। टूरिस्ट बस के नाम पर रोडवेज बस अड्डे के आसपास और हाईवे पर टोल प्लाजा से सवारियां बुलाकर बैठा रहे। इन बसों में मानकों का भी ध्यान नहीं रखा जाता है। इनमें अधिकतर बसों को दिल्ली रूट पर दौड़ाया जा रहा है। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, मेरठ और गोरखपुर समेत बिहार बॉर्डर तक के रूट पर भी निजी बसें चल रहीं हैं।
अधिकतर बसों पर टूरिस्ट लिखा है, लेकिन इन्हें डग्गामार वाहनाें की तरह चलाया जाता है। वहीं, कार से भी सवारी ढो रहे हैं। इससे रोडवेज बसों को पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही हैं। बताया गया कि बसों को खड़ा कर आवाज लगाकर सवारियों को भरा जाता है। जाम लगने के बावजूद यातायात पुलिस या परिवहन विभाग इनके ऊपर कार्रवाई नहीं करता है। बसों से सामान ढोने का नियम नहीं है। फिर भी इनमें सामान भरकर ले जाया जाता है।
अहम बात यह है कि कई बसों में अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं है। अधिकारी इन बसों की चेकिंग नहीं करते हैं। ऐसे में बिना मानक के ही बसों को चलाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार डग्गामार वाहनों के चलते दो से तीन लाख रुपये का रोजाना नुकसान हो रहा है।
निगम को ज्यादा नुकसान डग्गामार ही पहुंचा रहे। उन पर अंकुश लगाने के लिए विभाग से समन्वय बनाकर जांच की जाएगी। रोडवेज की बसें फिट हैं। पर्याप्त सवारी मिलने पर ही बसें गंतव्य के लिए रवाना किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
-आयुष भटनागर, एआरएम, बस्ती डिपो