बरेली में शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरी सिंह ढिल्लो लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने के साथ ही अपना मत प्रतिशत बढ़ाने में भी कामयाब हो गए। इस बार सपा प्रत्याशी को 2020 के चुनाव में मिले वोटों से कम वोट मिले, दूसरी ओर हरी सिंह की जीत का अंतर पिछले चुनाव के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा हो गया।
पांच चरणों की मतगणना में हरी सिंह पहले राउंड से ही बढ़त बनाने में कामयाब रहे। 2020 में वह 7,960 वोट के अंतर से चुनाव जीते थे। इस बार जीत का अंतर 17676 हो गया।
मतदान प्रतिशत में खास इजाफा नहीं, हार-जीत का अंतर बढ़ गया
2020 के चुनाव के मुकाबले इस बार चुनाव में मतदान प्रतिशत में खास इजाफा नहीं हुआ। दूसरी ओर हार-जीत का अंतर काफी बढ़ गया। 2020 में मतदान एक दिसंबर और मतगणना चार दिसंबर को हुई थी।
इस चुनाव में बरेली-मुरादाबाद मंडल के नौ जिलों में कुल 36703 में से 26803 मतदाताओं ने वोट दिया। इसमें 1290 वोट निरस्त हुए। कुल 25513 वोट गिनती में शामिल हुए। हरी सिंह ढिल्लो के पक्ष में कुल 12827 वोट पड़े।
सपा समर्थित संजय मिश्रा को 4864 वोट मिले थे। इस चुनाव में संजय मिश्रा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे उनको 981 वोट ही मिले। इस बार सपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाने वाले हाजी दानिश अख्तर 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 723 वोट ही हासिल कर सके थे। इस बार उनको 3996 वोट मिले।
निरस्त वोटों की संख्या भी बढ़ी, दहाई पार नहीं कर सके आठ प्रत्याशी
2020 के चुनाव में कुल 1290 वोट निरस्त किए गए थे। इस बार के चुनाव में कुल 3183 वोट निरस्त किए गए। कुल 17 में से आठ प्रत्याशी ऐसे भी रहे जो दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। पांच प्रत्याशी अपने मतों को तीन अंकों की गिनती तक नहीं पहुंचा सके।
नए कार्यकाल में लागू कराएंगे एजुकेशन एक्ट
परिणाम घोषित होने के बाद विजेता डॉ. हरी सिंह ढिल्लो ने कहा कि सपा प्रत्याशी की ओर से लगाए गए बूथ कैप्चरिंग और जानलेवा हमले के आरोपों को शिक्षक मतदाताओं ने ही नकार दिया। शिक्षकों के हित में छह साल जो काम किए हैं उनके आधार पर ही वोट मिले हैं। अब एजुकेशन एक्ट के लिए प्रयास कर रहे हैं। वित्तविहीन शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
सपा प्रत्याशी ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हाजी दानिश अख्तर ने व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। आरोप लगाया कि यह शिक्षकों और उनके असल मुद्दों का चुनाव था, जिसे शुरू से ही लूटने की साजिश रची गई। कहा कि हार-जीत अपनी जगह है, पर जिस तरह से इस चुनाव में नियम दरकिनार हुए, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है।
सुबह आठ बजे से शुरू हुई मतगणना, पहले बनाए गए बंडल
चुनाव में भाजपा और सपा समर्थित प्रत्याशियों के साथ ही कुल 17 प्रत्याशियों ने चुनौती पेश की। रिटर्निंग ऑफिसर शंभू कुमार ने बताया कि सुबह आठ बजे से मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले मतपेटियों से मतपत्रों को निकालकर 50-50 के बंडल बनाए गए। यह कार्य सुबह आठ से दोपहर करीब तीन बजे तक चला। शाम चार बजे मतगणना शुरू हो सकी। मतगणना स्थल पर आठ टेबल लगाई गई थीं, जहां प्रत्याशियों के एजेंट गिनती पर नजर रखे रहे।
समर्थकों को 100 मीटर पहले रोका
सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसमें तीन चरणों का सुरक्षा घेरा शामिल था। समर्थकों को मतगणना स्थल से सौ मीटर पहले ही रोक दिया गया था। परिसर के मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जहां जांच के बाद ही लोगों को प्रवेश मिला। इसके बाद मतगणना परिसर में दाखिल होने से पहले भी सघन तलाशी की व्यवस्था की गई थी।
इस तरह मतगणना स्थल के बाहर से लेकर अंदर तक सुरक्षा के तीन चरण बनाए गए। मतगणना की निगरानी और व्यवस्थाओं के लिए बरेली और मुरादाबाद मंडल के निर्वाचन संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। रात 11.30 बजे मतों की गणना पूरी हुई और विजेता घोषित हुए।
गलत तरीके से वोट गिनने का आरोप लगाकर हंगामा
समय बीतने के साथ प्रत्याशियों और उनके एजेंटों की बेचैनी बढ़ती रही। चुनाव मैदान में उतरे 17 प्रत्याशियों में से केवल पांच ने ही मतगणना स्थल पर कैंप लगाए। इनमें भाजपा के हरी सिंह ढिल्लो, सपा के दानिश अख्तर, निर्दलीय सुनीत गिरी, राजेंद्र गंगवार और राजीव कुमार चौहान के कैंप शामिल थे।
मतगणना के दूसरे दौर के दौरान सपा प्रत्याशी के एजेंटों ने गलत तरीके से वोट गिनने का आरोप लगाया। टेबल नंबर सात पर बहस होने पर पुलिस और अधिकारी मौके पर पहुंचे और वोट दोबारा खोलकर दिखाए, जिसके बाद एजेंट शांत हुए। टेबल नंबर पांच पर भी ऐसी ही बहस हुई, लेकिन कोई बड़ा हंगामा नहीं हुआ।
23 को हुआ था मतदान
शिक्षक एमएलसी निर्वाचन के लिए 23 अक्तूबर को 105 बूथों पर मतदान हुआ था। दोनों मंडलों के 46 हजार से ज्यादा मतदाताओं में से 35,149 यानी 73.69 फीसदी ने मताधिकार का प्रयोग किया था। मतगणना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक टेबल पर प्रत्याशियों को एक-एक काउंटिंग एजेंट तैनात करने की अनुमति दी गई है। सभी टेबल पर वीडियोग्राफी और पूरे हॉल में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। मतगणना के विभिन्न चरणों की जानकारी देने के लिए लाउडस्पीकर भी लगाए गए।
2020 के चुनाव में मिले वोट
| क्र. |
प्रत्याशी |
कुल वोट |
| 1 |
मेहंदी हसन |
276 |
| 2 |
संजय मिश्रा |
4,864 |
| 3 |
हरी सिंह ढिल्लो |
12,827 |
| 4 |
अभिषेक द्विवेदी |
04 |
| 5 |
आशुतोष शर्मा |
213 |
| 6 |
हाजी दानिश अख्तर |
723 |
| 7 |
पियूष सिंह राठौर |
61 |
| 8 |
पुष्पेंद्र कुमार |
04 |
| 9 |
बाल कृष्ण मित्रा |
64 |
| 10 |
डॉ. मेहताब अली |
54 |
| 11 |
डॉ. राजेंद्र गंगवार |
1,162 |
| 12 |
राम बाबू शास्त्री |
2,016 |
| 13 |
डॉ. विनय खंडेलवाल |
705 |
| 14 |
डॉ. सुनीत गिरी |
1,258 |
| 15 |
सुभाष चंद्र शर्मा |
1,283 |
मतगणना सारिणी (राउंड अनुसार)
| क्र. |
प्रत्याशी |
पहला |
दूसरा |
तीसरा |
चौथा |
पांचवां |
| 1 |
डॉ. हरी सिंह ढिल्लो |
5,251 |
10,222 |
14,990 |
19,538 |
21,672 |
| 2 |
हाजी दानिश अख्तर |
816 |
1,677 |
2,542 |
3,753 |
3,996 |
| 3 |
नरेश कुमार शर्मा |
46 |
48 |
94 |
105 |
113 |
| 4 |
नाज रिजवी |
10 |
32 |
42 |
55 |
59 |
| 5 |
नेत्रपाल |
9 |
18 |
27 |
29 |
31 |
| 6 |
बहार आलम |
7 |
12 |
19 |
20 |
21 |
| 7 |
रमेश चंद्र |
15 |
26 |
41 |
93 |
105 |
| 8 |
राज कुमार सिंह |
5 |
25 |
30 |
43 |
44 |
| 9 |
डॉ. राजीव कुमार |
107 |
228 |
335 |
394 |
481 |
| 10 |
डॉ. राजेंद्र गंगवार |
140 |
582 |
722 |
1,338 |
1,573 |
| 11 |
रेनू मिश्रा |
34 |
32 |
86 |
114 |
126 |
| 12 |
रोहिल अल्ताफ |
0 |
5 |
5 |
8 |
9 |
| 13 |
विद्युत कुमार |
3 |
6 |
12 |
12 |
12 |
| 14 |
विमलेंद्र कुमार शर्मा |
84 |
330 |
414 |
560 |
601 |
| 15 |
संजय कुमार मिश्रा |
210 |
387 |
597 |
888 |
981 |
| 16 |
डॉ. सुनीत गिरी |
576 |
874 |
1,450 |
1,949 |
2,143 |
| 17 |
हरेंद्र सिंह |
1 |
8 |
9 |
11 |
11 |
| 18 |
अस्वीकृत मत |
686 |
1,497 |
2,183 |
2,879 |
3,181 |
नोट: मतगणना रिपोर्ट के अनुसार।