बरेली। दिव्यांगता शरीर से नहीं, मस्तिष्क से होती है। भगवान हमें जिस हाल में रख रहे हैं, वही हमारे लिए सबसे अच्छा है। जीवन में कभी निराश न हों। अच्छी नीयत से किया जाने वाला कार्य हमेशा सफल होता है। ये बातें कारगिल युद्ध के दौरान दोनों पैर व एक हाथ गंवा चुके नायक दीपचंद ने पीलीभीत रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में बुधवार को कहीं। वह माधव राव सिंधिया स्कूल में आयोजित होने वाले वार्षिकोत्सव के लिए शहर आए हैं।
उन्होंने कहा कि अब शहीद जवानों की बोली लगने लगी है। कोई सरकार शहीद के परिजनों को 5 लाख रुपये देती है तो कोई 10 लाख। यह बहुत गलत है। शहीद जवान के परिजनों को कुछ देना है तो सरकार उनके घर जाकर दे। बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने 12 हजार गोले दागे। वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह तीन साल तक अस्पताल में भर्ती रहे। पत्नी को कई महीनों तक डाॅक्टरों ने बताया ही नहीं कि उनके दोनों पैर व एक हाथ कट चुका है। वह 2005 में सेना से सेवानिवृत्त हुए। इस दौरान स्कूल के निदेशक सौरभ अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
कभी सोचा नहीं था कि उठ कर खड़ा हो पाऊंगा
दीपचंद ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरणा लेकर सेना में भर्ती हुआ। पिता ने सेना में जाने के लिए मना किया था, लेकिन दादा ने कहा कि एक बेटा देश को दे दो, दूसरा तुम्हारा ख्याल रखेगा। कारगिल युद्ध के बाद कभी सोचा नहीं था कि उठकर खड़ा हो पाऊंगा, लेकिन मन में इच्छा थी कि एक बार खड़ा होकर दिखाऊंगा। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कार चलाकर रिकाॅर्ड बनाया। वह स्कूटी, साइकिल चला लेते हैं। कहा कि भर्ती के दौरान 6.5 फिट का था, अब 3.5 फिट का ही रह गया हूं।
महिलाएं अपने अंदर बढ़ाएं आत्मविश्वास
वर्ष 2022 की मिसेज इंडिया इंटरनेशनल रहीं विनीता भाटिया ने कहा कि महिलाओं में सौंदर्य की प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। इसके साथ ही हमें अपने अपने आत्मविश्वास को भी बढ़ाना होगा। आपको चीजों को समझ कर उनका सामना करना आना चाहिए। रंग से कोई फर्क नहीं पड़ता। कई देशों की सांवली महिलाओं ने भी सुंदरता के खिताब अपने नाम किए हैं। संवाद