बरेली। बिलवा ग्राम स्थित जलाशय पर एल्डिको कंपनी के निर्माण गतिविधियों से संभावित अतिक्रमण और पर्यावरणीय प्रभाव के संबंध में तीन मामलों की राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई की। एनजीटी ने कहा कि जिलाधिकारी दो सप्ताह के भीतर स्थलीय निरीक्षण सहित विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करें।
एनजीटी ने कहा कि बरेली विकास प्राधिकरण यह जांच करें कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का निर्माण कार्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। एसईआईएए, उत्तर प्रदेश को आवश्यक पक्ष मानते हुए प्रतिवादी बनाया गया और उत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया। अन्य प्रतिवादियों को उत्तर व प्रति-उत्तर दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। इसके साथ ही जिलाधिकारी की आगे की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी।
एनजीटी की प्रधान पीठ के समक्ष जिलाधिकारी अविनाश सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंंने कहा कि गाटा संख्या 508 पर जलाशय मौजूद है और उसके चारों ओर की निजी कृषि भूमि को परियोजना प्रवर्तक द्वारा खरीदा जा चुका है। बरेली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए. ने बताया कि जलाशय की परिधि से 75 मीटर के अंदर निर्माण कार्य किया जा रहा है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने जलाशयों के चारों ओर 75 मीटर नो-कंस्ट्रक्शन जोन अनिवार्य किया है। यह आदेश स्थानीय अधिकारियों को समय पर उपलब्ध नहीं था।एनजीटी ने इस पर चिंता व्यक्त की कि जलाशय का कैचमेंट क्षेत्र मुक्त नहीं छोड़ा गया है और उसे परियोजना द्वारा बनाई गई अस्थायी चहारदीवारी के भीतर घेर लिया गया है। इससे भविष्य में जलाशय के सूखने का खतरा बढ़ सकता है।