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Bareilly News: संसाधन बढ़े पर कम नहीं हुई बिजली कटौती

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बरेली। शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने के नाम पर मोटा बजट खपाने के बाद भी आपूर्ति को लेकर हायतौबा कम नहीं हो रही। साउथ सिटी में 220 केवी का एक नया ट्रांसमिशन और 33/11 केवी के पवन विहार व सुभाषनगर न्यू उपकेंद्र ने भी इस साल काम शुरू कर दिया है, इसके बाद भी जिम्मेदारों के कुप्रबंधन का साफ असर बिजली आपूर्ति पर दिख रहा है। बिजली कटौती को लेकर शासन स्तर तक किरकिरी होने के बाद अभियंता चेते तो दो दिन से शहर के कुछ इलाकों में मामूली सुधार जरूर हुआ है।
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गर्मियों के सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए शहर में 20 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि की गई। हरूनगला उपकेंद्र का पांच एमवीए भार कम करने को लक्ष्य, पवन विहार, सेटेलाइट और जगतपुर फीडर को नए बने पवन विहार उपकेंद्र से जोड़ा गया।
सुभाषनगर उपकेंद्र के करगैना, बीडीए कॉलोनी-टू और सराय तल्फी फीडरों को सुभाषनगर न्यू उपकेंद्र से जोड़ा गया। इसके अलावा मढ़ीनाथ, सुभाषनगर, किला और सराय तल्फी उपकेंद्रों को 33 केवी की आपूर्ति 220 केवी ट्रांसमिशन साउथ सिटी से शुरू की गई।
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मरम्मत, लाइनों को बदलने समेत अन्य कार्यों पर 1700 करोड़ से ज्यादा खर्च होने के बाद भी इस वर्ष जब तापमान 40 डिग्री के पार हुआ तो विद्युत निगम का कुप्रबंधन सामने आ गया।


परेशान हो रहे आम लोगअभियंताओं की मनमानी भी सामने आई। सबसे ज्यादा समस्या लोकल फॉल्ट समय से ठीक न होने और करोड़ों खर्च होने के बाद भी ओवर लोडिंग के कारण हुई। 21 मई को वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार ने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखा तब कुप्रबंधन शासन के संज्ञान में आया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर तबादलों का चाबुक भी चला है। हालांकि, तमाम इलाकों में अब भी स्थिति बदहाल है।

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फोटो-
एमडी ने वन राज्यमंत्री से की बात, अभियंताओं की ऑनलाइन बैठक ली

बरेली। शासन स्तर तक किरकिरी होने के बाद रविवार को 10 अभियंताओं का कार्यक्षेत्र बदल दिया गया। रविवार को मुख्यमंत्री ने भी कड़ा रुख अपनाया। इधर, सोमवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने अभियंताओं की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक लेकर स्थिति को जाना। इसके बाद उन्होंने वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार को कॉल करके स्थिति के बारे में जानकारी ली। वन राज्यमंत्री ने बताया कि कुछ इलाकों में ही सुधार हुआ है, अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने बताया कि वह लगातार एमडी और ऊर्जा मंत्री के संपर्क में हैं। स्थानीय स्तर पर बेवजह कटौती और कुप्रबंधन पर उनकी नजर है।




समय पर ठीक नहीं हो रहे फॉल्ट

वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई। नियमित कर्मचारियों को 33 केवी वर्टिकल में भेज दिया गया। इससे वर्टिकल 11 केवी, एलटी लाइन में स्टाफ कम हो गया। पहले फॉल्ट की मरम्मत के लिए एक शिफ्ट में तीन-तीन कर्मचारियों के तीन गैंग हुआ करते थे। इस तरह तीन शिफ्ट में 27 कर्मचारी एक उपकेंद्र पर मरम्मत व अन्य कार्यों को तैनात रहते थे। अब हालात बदले हुए हैं। 200 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी के बाद नौ के स्थान पर तीन गैंग ही काम कर रहे हैं। इस कारण लोकल फॉल्ट समय से सही नहीं हो रहे।





मुख्य अभियंता का दावा, कर्मचारियों के 10 नए गैंग लगाए
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने दावा किया है कि लोकल फॉल्ट समय से ठीक हों और निर्बाध आपूर्ति बनी रहे इसके लिए कर्मचारियों के 10 नए गैंग लगाए गए हैं। उनका दावा है कि कोई छंटनी नहीं की गई है। दूसरी ओर छंटनीशुदा कर्मचारियों की लिस्ट पिछले कई दिनों से विद्युत निगम के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हो रही है। कई कर्मचारी नेता भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
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