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कई संगठन हमारे संपर्क में, जल्द लेंगे फैसला : अलंकार

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निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट बोले- मानवाधिकार का हुआ हनन, आवास को बना दिया मिनी जेल
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बरेली। निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बुधवार को कहा कि उनके आवास को मिनी जेल बना दिया गया है। वह बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए दावा किया कि राज्य के कई संगठन उनके संपर्क में हैं। विकल्पों पर विचार कर जल्द ही बड़ा फैसला लेंगे।
उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर पूरे देश का सवर्ण समाज परेशान है। इसमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को पहले से ही अपराधी मान लिया गया है। कोई भी व्यक्ति झूठी शिकायत कर सामान्य वर्ग के युवाओं और उनके परिजन को बड़ी आसानी से फंसा सकता है। यह व्यवस्था समाज में जहर घोलने जैसी है। यह नियम छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांट देगा। शैक्षिक संस्थानों में आंतरिक कलह बढ़ेगी और देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। समय ऐसा भी आ सकता है कि भारतीय सेना को देश की सीमा छोड़कर आंतरिक मोर्चा न संभालना पड़ जाए। उधर, एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री को नजरबंद किए जाने की बात निराधार है। वह अब भी लोकसेवक हैं और सरकारी अधिकारियों की कॉलोनी में रह रहे हैं। उनकी सुरक्षा के लिहाज से फोर्स तैनात की गई है।
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नंबर सर्विलांस पर लगे होने का लगाया आरोप
निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि उनका और उनके कई प्रमुख समर्थकों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए गए हैं। उनके निकटवर्ती अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर हैं। अलंकार ने कहा कि उन्होंने साथियों को बता रखा है कि जब उनका मोबाइल नॉट-रीचेबल हो जाए या कोई छीन ले, उस परिस्थिति में बात करने के लिए कोड बनाया है। वह कोड उन्होंने अपने दो साथियों को दिया है। यदि कोई व्यक्ति एआई के माध्यम से भी उनके मोबाइल फोन से किसी से बात करना चाहेगा तो जब तक कोड सत्यापित नहीं होगा, तब तक वह ऐसा नहीं कर पाएगा। संवाद
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