बिजली बिल समायोजन में 67 लाख के गबन की जांच अधूरी
बिजली बिलों के समायोजन के नाम पर भ्रष्टाचार का मामला नया नहीं। लाइन कुली के घूस लेते पकड़े जाने से पहले भी बिल समयोजन के नाम पर यहां 67 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया था। अब तक इसकी जांच भी पूरी नहीं हो सकी है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल के आदेश पर मामले की जांच के लिए जनवरी में ने चार सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी।
इस मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुरेंद्र गौतम और अनुज गुप्ता को चार्जशीट दी जा चुकी है। शहर में वर्टिकल व्यवस्था शुरू होने से बिजली बिलों में संशोधन के नाम पर घपलेबाजी की गई थी। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल ने मामले को पकड़ा था। जांच की गई तो पता लगा कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनुज गुप्ता के कार्यकाल के नौ मामलों में 17.34 लाख रुपये और अधिशासी अभियंता सुरेंद्र गौतम के कार्यकाल में 135 बिलों के संशोधन में 49.67 रुपये समायोजित कर खेल कर दिया गया।
इससे बिजली निगम को राजस्व की क्षति हुई। दोनों अधिकारियों ने औद्योगिक इकाइयों के बिलों का समायोजन किया था। इस मामले में लेखा विभाग के एक अधिकारी, दो लिपिक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी जांच चल रही है।