बरेली। शहर को जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम का नाला सफाई अभियान महज करोड़ों रुपये के बंदरबांट का जरिया बनता नजर आ रहा है। 29 बड़े नालों की सफाई के लिए करीब 4.5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर पांच अलग-अलग फर्मों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन ठेकेदार नालों की गहराई से सिल्ट निकालने के बजाय ऊपर का कचरा हटाकर सिर्फ बजट की सफाई कर रहे हैं।
निगम की ओर से राजवी कॉलोनी से रेलवे की पुलिया तक, अशोका फोम के सामने से मिशन कम्पाउंड तक, साहू गोपीनाथ से दिनेश नर्सिंग होम तक, सेटेलाइट से लेकर सतीपुर चौराहे तक, जोन चार में चमेली की बगिया से प्रेमनगर जोशी टोला तक आदि नालों की सफाई एजेंसियों के जरिये कराई। अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो पता चला कि तली में जमी गाद को निकालने के बजाय ठेकेदारों ने सिर्फ ऊपर का कचरा ही हटाया है। इन नालों के नीचे सिल्ट पटी हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि जिन बड़े नालों को साफ करने के लिए पोकलेन, चेन मशीन और जेसीबी जैसे भारी उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य था, वहां महज चंद मजदूरों को उतारकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। नगर विकास मंत्री से लेकर जिलाधिकारी और नगर आयुक्त लगातार समीक्षा बैठकें कर गुणवत्तापूर्ण काम कराने की हिदायत दे चुके हैं, , लेकिन काम पुराने ढर्रे पर ही हो रहा है। इससे स्थानीय निवासियों में आक्रोश है।
नाला सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये की बर्बादी पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मानसून सिर पर है। ऐसे में अगर जरा सी बारिश में शहर के रिहायशी इलाकों में पानी भरता है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? फिलहाल, नालों की यह अधूरी और कागजी सफाई साफ संकेत दे रही है कि इस बार भी शहर के लोगों को जलभराव से मुक्ति मिलने वाली नहीं है।
वर्जन
नाला सफाई में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जेई व एई को भेज कर मॉनीटरिंग कराई जा रही है। लापरवाही बरतने पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त