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Balrampur News: कोयलाबास बॉर्डर से खुलेगी तरक्की की राह

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बलरामपुर के तुलसीपुर में बैठक करते व्यापारी। संवाद
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भारत–नेपाल सीमा स्थित कोयलाबास बॉर्डर अब फिर से व्यापार का बड़ा केंद्र बनने की राह पर है। शासन की ओर से भंसार सुविधा बहाल करने और 25 हजार रुपये तक के सामान के निर्यात सीमा बढ़ाने के प्रयास ने स्थानीय व्यापारियों में नई ऊर्जा का संचार किया है। तुलसीपुर और जरवा क्षेत्र के व्यापारी इसे सरहद पार कारोबार के सुनहरे भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
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तुलसीपुर में शनिवार को हुई बैठक में गल्ला, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, बर्तन और किराना कारोबार से जुड़े व्यापारी जुटे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता ने कहा कि यदि कोयलाबास से सीधे एक्सपोर्ट की सुविधा शुरू होती है तो तुलसीपुर से करोड़ों का कारोबार होगा। इससे समय और लागत दोनों बचेगी।
नगर के प्रमुख कारोबारी राजीव अग्रवाल, सत्यम, सुरेश, जीवन, रामशंकर और रिंकू खान ने भी इस कदम को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सीमा और कस्टम सुविधा में ढील मिलने पर टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ कपड़े व बर्तनों का कारोबार नेपाल से तेजी पकड़ेगा। बैठक में तय हुआ कि व्यापारी प्रतिनिधिमंडल जल्द ही विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह से मुलाकात कर कोयलाबास बॉर्डर को व्यापार के लिए सुलभ बनाने की मांग करेगा। व्यापारियों का विश्वास है कि यह कदम सफल रहा तो तुलसीपुर और आसपास का क्षेत्र एक बार फिर व्यापारिक गतिविधियों का गढ़ बनेगा।
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सरहद पार का गणित
जरवा से कोयलाबास की दूरी महज 20 किलोमीटर है। नेपाल के लमही तक 30, घोड़ाही तक 20, भालूबांग तक 60 और कृष्णानगर तक 80 किलोमीटर का फासला तय कर व्यापारी आसानी से कारोबार कर सकते हैं। व्यापारियों का कहना है कि इतना नजदीकी रास्ता होने के बावजूद यह बंद होना सबसे बड़ी विडंबना है।
अतीत की रौनक, आज का सन्नाटा
व्यापारी हीरालाल यादव ने बताया कि कभी इसी मार्ग से लकड़ी, पत्थर, कोयला और अनाज का करोड़ों का व्यापार नेपाल से होता था। राजनीतिक षड्यंत्र के तहत यह मार्ग बंद करा दिया गया। तभी से जरवा और कोयलाबास बाजार उजड़ गए। लोग मजबूर होकर तुलसीपुर, लमही और दांग की ओर पलायन कर गए। कोयलाबास के पूर्व प्रधान इब्राहिम खान कहते हैं कि व्यापार बंद होने से जरवा और कोयलाबास बाजार सुनसान हो गए। व्यापारियों को आजीविका के लिए तुलसीपुर, लमही व दांग पलायन करना पड़ा।
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कोयलाबास बॉर्डर खुलने के फायदे
-तुलसीपुर-जरवा क्षेत्र को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ
-नेपाल के बड़े बाजारों तक आसान होगी पहुंच
-लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
-उजड़े बाजारों में फिर लौटेगी रौनक
-पलायन रुकेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
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