सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के पदाधिकारी अपनों से ज्यादा टिन्नू पर भरोसा करते हैं। तिकड़ी ने पहले उनके भतीजे को इसमें शामिल किया, फिर खुद का अधिक फायदा देखकर उसको किनारे करवा दिया। इसके लिए टिन्नू ने पदाधिकारी से उनके भतीजे की शिकायत की थी। इस पर उसको हटाया गया है। वर्तमान में मंदिर के चढ़ावे आदि का पूरा काम सिर्फ तिकड़ी के पास था।
मामले में ये तिकड़ी और नीचे जो कर्मी चढ़ावे की रकम पार कर रहे थे, इन सभी का कहां और किन लोगों के साथ कनेक्शन है, अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। जब ये स्पष्ट हो जाएगा, तब पता चल जाएगा कि हेरफेर में कौन-कौन लोग शामिल थे। किन लोगों की शह थी और कौन साजिशकर्ता थे।
टिन्नू व उसके रिश्तेदारों ने ट्रस्ट में करीब 35 से 40 लोगों को काम पर रखवाया है। चूंकि टिन्नू के पास ट्रस्ट का पूरा काम रहता था। एक तरह से वह पूरी पॉवर में है। इसलिए वह जिसको चाहता, उसी को काम पर लगावाता था। चूंकि इनके जरिये इन सभी को नौकरी मिली है लिहाजा उनके इशारे पर हर काम करने को ये सभी तैयार रहते हैं।