अयोध्या। ऋषभदेव नेत्र चिकित्सालय की 37 वर्षीय नेत्र सर्जन की आत्महत्या के मामले में पुलिस के बयानों में बदलाव सामने आया है। शनिवार रात साकेत महाविद्यालय के सामने स्थित चिकित्सालय के आवासीय परिसर में उनका शव फंदे से लटका मिला था। वह मूलरूप से झारखंड के रांची की रहने वाली थीं और उनके परिजन लखनऊ में रहते हैं। मौके से दो-तीन पेज का सुसाइड नोट मिला था, जिसे पुलिस ने रात में ही उनके साथ काम करने वाले चिकित्सकों को पढ़वाया था।
घटना के बाद कोतवाल अयोध्या पंकज सिंह ने बताया था कि सुसाइड नोट में बीमारी से परेशान होने व कुछ न कर पाने की बात लिखी थी। हालांकि, चिकित्सकों व मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस के इस दावे से इन्कार किया। उनका कहना था कि नोट में बीमारी का जिक्र नहीं था। चिकित्सकों के अनुसार वह एक पैर से दिव्यांग थीं, लेकिन उनका हौसला बुलंद था और व्यवहार में तनाव जैसा कोई बदलाव नहीं दिखा।
बाद में सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने भी बीमारी का जिक्र होने से इन्कार किया और पारिवारिक कारण की संभावना जताई। परिजनों ने किसी पर संदेह नहीं जताया और तहरीर भी नहीं दी है। इसी वजह से फिलहाल मामले में आगे की जांच नहीं की गई है।