22-छठ पर्व पर घर में पूजन करतीं महिलाएं।-संवाद
अयोध्या। सूर्य षष्ठी के लोकपर्व पर सोमवार को व्रती महिलाएं सात, नौ और 11 के बांस के सूप में पूजन सामग्री रखकर अस्तचलागामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। रविवार की शाम घाट की वेदियों पर दीप जलाकर महिलाओं ने एक दूसरे की मांग में सिंदूर लगाया। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ हो गया।
वहीं रात भर समूह में उगा हे सूरज देव, भइल भिनसरवा... जैसे छठी मैया के गीत गाए। सोमवार को व्रती महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को सरयू किनारे घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन करेंगी। लोक आस्था के पर्व छठ पर रविवार को व्रती महिलाओं ने सुबह से लेकर शाम तक निर्जला व्रत रखा। दोपहर में शुद्ध ईंट व मिट्टी से नया चूल्हा बनाया गया। दिन भर ठेकुआ, खजूर (मोठा खस्ता) के लिए आटे को तैयार करवाया। शाम के समय छठी मैया के लिए पूजा का प्रसाद रसियाव (खीर) व रोटी का प्रसाद ग्रहण करने के बाद परिजनों को प्रसाद का वितरण किया गया।
रायगंज निवासी अर्चना ने बताया कि सोमवार को व्रती व अन्य महिलाएं स्नान के बाद मिट्टी के चूल्हे पर ठेकुआ व खजूर बनाएंगी। शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर पर कोसी भरी जाएगी। मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय पर्व का समापन होगा। वहीं शहर से लेकर देहात तक सरयू के घाटों पर दिन भर तैयारियां चलती रहीं।
क्या है कोशी भरने की परंपरा
छठ मइया से मांगी गई मनौती पूरी होने के बाद कोशी भरी जाती है। इसके लिए मिट्टी के बड़े कलश जिस पर छह दीपक होते हैं, चारों ओर गन्ने के 12 पौधों का समूह बनाकर उसे छतरी का स्वरूप देते हैं। इसके बाद आंगन में ही इसकी पूजा की जाती है। सुबह नदी किनारे गन्ने की छतरी बनाकर उसके नीचे मिट्टी के छह दीपकों वाला बड़ा कलश और मिट्टी का ही हाथी रखकर यह प्रक्रिया दोहराई जाती है।