औरैया। रोडवेज बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किए गए दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए हर सीट के पास लगाए गए पैनिक बटन कई बसों में या तो टूटे पड़े हैं या फिर लगाए ही नहीं गए। ऐसे में 15 मिनट में सुरक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कागजी बनकर रह गई है।
पैनिक बटन दबाते ही बस की लोकेशन सीधे पुलिस कंट्रोल रूम और परिवहन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचती है, ताकि तत्काल कार्रवाई हो सके। यह व्यवस्था खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और रात के समय यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू की गई थी लेकिन रोडवेज बसों में इस अहम सुरक्षा फीचर की अनदेखी साफ दिखाई दे रही है।
औरैया रोडवेज डिपो में वर्तमान में 65 बसें संचालित हैं। अधिकांश बसों में पैनिक बटन सिर्फ नाम के हैं। कहीं बटन दबाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती तो कहीं सीटों के पास बटन दिखाई ही नहीं देते। अगर चलती बस में कोई आपराधिक घटना हो जाए तो मदद मांगने का कोई त्वरित जरिया मौजूद नहीं है। औरैया डिपो की बस में कई बटन टूटे मिले। एक दूसरी बस में पैनिक बटन लगे ही नहीं थे।
गंभीर बात यह है कि सुरक्षा से जुड़ी इस व्यवस्था की नियमित जांच और मरम्मत की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। बसों की फिटनेस और कागजातों पर तो सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन यात्रियों की जान से जुड़े इंतजामों पर लापरवाही बरती जा रही है।
मेंटनेंस में होती है अनदेखी
रोडवेज बसों का मेंटेनेंस होता रहता है। डिपो में ही वर्कशॉप बना है, जहां मरम्मत कार्य किया जाता है। इस मेंटेनेंस कार्य में पैनिक बटन पर ध्यान नहीं दिया जाता। कर्मचारी इसे छोड़ देते हैं। यही कारण है कि ये बटन किसी बस में टूटे हैं तो किसी में खराब हैं।
पैनिक बटन हर बस में काम करें, इसके लिए मेंटीनेंस विभाग को निर्देशित किया गया है। कुछ पुरानी बसों में ये बटन नहीं लगे हैं, उनमें भी लगवा दिए जाएंगे।
- अपर्णा मीनाक्षी, एआरएम रोडवेज
फोटो-2-बस में टूटा पड़ा पैनिक बटन। संवाद