अजीतमल। नगर स्थित जनता इंटर कॉलेज सभागार में रविवार को आयोजित गुरु-शिष्य सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के पूर्व छात्रों ने पूर्व गुरुजनों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सम्मेलन के दौरान शिक्षकों और शिष्यों ने पुराने दिनों की स्मृतियों को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर बुद्धसेन सक्सेना ने कहा कि शिष्य को अहंकार त्यागकर गुरु द्वारा बताए गए आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। गिरजाशंकर शास्त्री ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
शिवप्रकाश दुबे ने कहा कि संस्कृति, आदर्शों और कर्तव्यों की झलक दिखाने वाली पारंपरिक गुरु-शिष्य शिक्षा भारत की शान है। आदित्य विश्नोई ने रामकृष्ण परमहंस एवं गुरु रामदास जैसे महान संतों के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डाला। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश पांडेय ने माता-पिता को जीवन का प्रथम गुरु बताया।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य कृष्ण मोहन उपाध्याय, होशियार सिंह राजपूत, राहुल चौहान आरके सिंह, यशकरन सेंगर, विश्वरूप पांडेय, डॉ. रवीना सिंह, उषा रमन, डॉ. रीता सिंह, राजेंद्र सचान, प्रताप सिंह, विमल बाजपेई, सुरेश चौधरी, प्रभंजन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।