अमेठी सिटी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने भादर ब्लॉक की ग्राम प्रधान भानमती को अंतरिम राहत दी है। न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट के 28 मार्च के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें जांच के आधार पर उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे। प्रस्तावित वसूली कार्रवाई भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर प्रति शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद याचिकाकर्ता अपना प्रत्युत्तर प्रस्तुत करेंगी।
ग्राम प्रधान की ओर से अदालत में कहा गया कि इससे पहले भी अधिकार सीज करने संबंधी आदेश जारी हुआ था, जिसे चुनौती मिलने पर राहत मिली थी। उनके अधिवक्ता ने तर्क रखा कि 28 मार्च का आदेश पूर्व जांच रिपोर्ट की सामग्री पर आधारित है और उपलब्ध अभिलेखों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायालय ने माना कि विवाद पर विस्तृत विचार आवश्यक है। इसी आधार पर आदेश और उससे जुड़ी वसूली प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी गई। मामले की अगली सुनवाई प्रतिवादियों का जवाब आने के बाद होगी।