अमेठी। सुंदरपुर मजरे दरखा गांव में किसान रामसजीवन गुप्ता की आग से झुलसने के बाद हुई बृहस्पतिवार को हुई मौत के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से शनिवार को परिजन आक्रोशित हो उठे। उन्होंने घर के सामने प्रदर्शन कर गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग उठाई। तनाव को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस मामले में पिता व उनके दो पुत्रों पर एफआईआर दर्ज हुई है।
मृतक के बड़े भाई कालिका गुप्ता ने बताया कि रामसजीवन को लंबे समय से जान का खतरा महसूस हो रहा था। इसी कारण वह घर के भीतर रहने के बजाय बाहर छप्पर में सोता था। परिजनों का कहना है कि कई दिनों से जगन्नाथ गुप्ता के परिवार संग विवाद चला आ रहा था। इस संबंध में पुलिस को जानकारी दी गई थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि घटना की रात रामसजीवन पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी गई।
आग की लपटों से घिरे रामसजीवन शोर मचाते हुए बाहर की ओर भागे। आवाज सुनकर पत्नी फुलपती जागीं और बाहर निकलीं, जहां रामसजीवन को जलती हालत में भागते देखा। परिजनों ने आग बुझाकर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत में रायबरेली रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
उनका कहना है कि पिता ने पूर्व में संपत्ति दूसरे पक्ष के नाम कर दी थी, जिसकी जानकारी बाद में सामने आई। मौत के बाद पुलिस ने शव रखकर प्रदर्शन करने के बाद जगन्नाथ गुप्ता और उनके बेटे सचिन व सतीश पर एफआईआर दर्ज की। इसके बाद भी पुलिस कार्रवाई के बजाए आरोपियों को बचाने की कोशिश में जुटी है। परिवार ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। क्षेत्राधिकारी मनोज मिश्र ने बताया कि प्रकरण की जांच चल रही है। सभी तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।