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हिंदी दिवस : ‘न्याय वही, जो आमजन को समझ आए’, हिंदी में 38,600 से अधिक फैसले लिख चुके हैं न्यायमूर्ति चौधरी

Mon, 14 Sep 2026 01:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

न्याय केवल किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिस व्यक्ति के लिए न्याय किया जा रहा है, उसे न्यायिक निर्णय समझ में भी आना चाहिए। इसी सोच के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने हिंदी को अपने न्यायिक लेखन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है।
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डॉ. गौतम चौधरी, न्यायमूर्ति। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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न्याय केवल किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिस व्यक्ति के लिए न्याय किया जा रहा है, उसे न्यायिक निर्णय समझ में भी आना चाहिए। इसी सोच के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने हिंदी को अपने न्यायिक लेखन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया है। उनकी ओर से अब तक हिंदी में पारित निर्णयों और आदेशों की संख्या 38,600 से अधिक हो चुकी है। हिंदी दिवस के अवसर पर उनका यह प्रयास न्यायिक कार्य में हिंदी के व्यापक प्रयोग और आमजन तक न्याय को सहज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी हिंदी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानते। उनके लिए हिंदी अपनी जड़ों, संस्कृति और आमजन से जुड़ने का सहज माध्यम है। उन्होंने औपचारिक अवसरों तक हिंदी के प्रयोग को सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपने दैनिक न्यायिक कार्य और विधिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बनाया है।

उनका मानना है कि आम नागरिक के लिए उसकी अपनी भाषा में न्यायिक निर्णय को समझ पाना न्याय तक उसकी पहुंच को अधिक सार्थक बनाता है। उनके हिंदी में दिए गए हजारों निर्णय आने वाली पीढ़ियों के न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, विधि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। इन निर्णयों के माध्यम से हिंदी की विधिक शब्दावली और न्यायिक अभिव्यक्ति को लगातार समृद्ध करने की प्रक्रिया दिखाई देती है।

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