वृंदावन में की गई थी कथित टिप्पणी
वृंदावन में भागवत कथा के दौरान ब्राह्मण समाज की कुछ उप जातियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी अब कानूनी विवाद में बदल गई है। इस मामले में सुरेश चंद्र उपाध्याय ने स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में केस दर्ज करने का आदेश देते हुए रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है।
तीन फरवरी 2024 की टिप्पणी को लेकर विवाद
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि तीन फरवरी 2024 को मथुरा के वृंदावन में आयोजित भागवत कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज की कुछ उप जातियों को लेकर टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायक और दीक्षित जैसी उप जातियों के संदर्भ में कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में कहा गया है कि कथित बयान में इन उप जातियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गई और उनके साथ विवाह संबंधों को लेकर भी बात कही गई थी। इस बयान का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
शिकायतकर्ता ने लगाया सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने का आरोप
सुरेश चंद्र उपाध्याय का आरोप है कि इस टिप्पणी से संबंधित उप जातियों से जुड़े लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि बयान सामने आने के बाद समाज के लोगों को कथित तौर पर अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टिप्पणी का असर सामाजिक संबंधों के साथ-साथ बच्चों के विवाह से जुड़े मामलों पर भी पड़ रहा है। शिकायतकर्ता ने इसे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और मानहानि से जुड़ा मामला बताया है।
पुलिस और प्रशासन में शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचे
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले में पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत की गई थी। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया। सुरेश चंद्र उपाध्याय ने 14 सितंबर को अदालत में परिवाद दाखिल किया था। मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत की ओर से उन्हें नोटिस भी जारी किया गया है।