लाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग जोड़े के अपनी मर्जी से शादी करने के मामले में पुलिस के अनावश्यक हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई है। कहा कि बार-बार कहा गया है कि पुलिस का काम अपराधों की जांच करना है, शादियों की नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग जोड़े के अपनी मर्जी से शादी करने के मामले में पुलिस के अनावश्यक हस्तक्षेप पर नाराजगी जताई है। कहा कि बार-बार कहा गया है कि पुलिस का काम अपराधों की जांच करना है, शादियों की नहीं। इसके बावजूद ऐसे मामलों के प्रति पुलिस का आकर्षण कम नहीं हो रहा। इस टिप्पणी संग जेजे मुनीर व न्यायमूर्ति अचल सचेदव की खंडपीठ ने लड़के के पिता को थाने बुलाकर बार-बार पूछताछ करने के मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) व सराय ख्वाजा के थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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जौनपुर के सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र की युवती ने एक युवक से अपनी मर्जी से शादी की थी। युवक के खिलाफ थाने में अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कोर्ट ने अगस्त 2024 में ही उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। मामले में पुलिस फाइनल रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर चुकी है। इसके बावजूद लड़के के पिता को थाने बुलाकर परेशान किया जा रहा था। हाईकोर्ट ने पुलिस के इस आचरण पर गहरी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी से पूछा है कि जब केस में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है तो बुजुर्ग पिता को थाने क्यों बुलाया जा रहा है। अगली सुनवाई छह जुलाई को होगी।