कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। कहा कि रंजीत और बलिराम जैसे आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और विशिष्ट भूमिका साबित नहीं हो सकी। अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों ने किसी समान उद्देश्य के साथ वारदात को अंजाम दिया था। अदालत ने घायल गवाह विक्रम सिंह की दूसरे घटनास्थल यानी नैसरे गांव में मौजूदगी को भी संदेहास्पद बताया। कहा कि गोली लगने, अधिक उम्र और बीमारी की स्थिति में नदी पार कर दूसरे गांव तक हमलावरों का पीछा करना सामान्य मानवीय आचरण के विपरीत प्रतीत होता है।
लिहाजा, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अपील के दौरान 10 में से छह आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ अपील पहले ही समाप्त हो चुकी थी। शेष आरोपियों के खिलाफ भी सरकारी अपील में कोई दम न पाते हुए हाईकोर्ट ने इसे गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया।