फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेन-जी का दम: जंतर-मंतर के बाद अलीगढ़ में दिखा, एएमयू में 18 दिन के आंदोलन की भेंट चढ़े प्रॉक्टर नवेद, हटाए

Fri, 09 Oct 2026 12:52 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  (एएमयू) में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के बीच यूनिवर्सिटी  प्रशासन ने प्रॉक्टर बदल दिया है। आंदोलन के 19वें दिन राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मो. नफीस अहमद अंसारी को नया प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है।
Register For Event
विज्ञापन
प्रॉक्टर हटाने का आदेश, नए प्रॉक्टर प्रोफेसर मो. नफीस अहमद अंसारी - फोटो : विवि
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी के आगे नतमस्तक होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के हटाने जैसा नजारा एक बार फिर यूपी के अलीगढ़ में देखने को मिल रहा है। जेन-जी की ताकत को मानते हुए छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर 18 दिन तक आंदोलन के आगे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने भी अपने प्रॉक्टर को हटा दिया है। 

विज्ञापन


अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  (एएमयू) में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के बीच यूनिवर्सिटी  प्रशासन ने प्रॉक्टर बदल दिया है। आंदोलन के 19वें दिन राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मो. नफीस अहमद अंसारी को नया प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है। वह प्रो. मोहम्मद नवेद खान की जगह लेंगे। 
विज्ञापन

छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर विश्वविद्यालय में कई दिनों से विरोध-प्रदर्शन जारी है। कुलपति प्रो. नईमा खातून ने एएमयू एक्ट, 1920 की धारा 19(3) और विश्वविद्यालय के नियम-12 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कार्यकारी परिषद की ओर से प्रो. अंसारी की नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति दो साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी। वह तत्काल प्रभाव से अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ प्रॉक्टर का अतिरिक्त दायित्व भी संभालेंगे। प्रोफेसर मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। वह 1994 में लेक्चरर के रूप में एएमयू से जुड़े, 2003 में रीडर और 2009 में प्रोफेसर बने।

Trending Videos
विज्ञापन

नए प्रॉक्टर के सामने चुनौतियों का पहाड़
एएमयू में प्रॉक्टर की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी के सामने शुरुआत से ही कई चुनौतियां होंगी। छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना, परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और छात्र-प्रशासन के बीच भरोसा बहाल करना उनकी प्राथमिकता होगी। 19 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद बदले माहौल में प्रॉक्टर की भूमिका और भी अहम हो गई है। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चले आंदोलन में निलंबन, एफआईआर, भूख हड़ताल और छात्रों के विरोध ने यूनिवर्सिटी के माहौल को प्रभावित किया।

नए प्रॉक्टर की नियुक्ति पर सवाल
एएमयू में नवनियुक्त प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी की नियुक्ति पर सवाल उठे हैं। राजनीति विज्ञान विभाग की शिक्षिका प्रो. रचना कौशल ने उन पर सांप्रदायिक आधार पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच कुलपति के स्तर पर लंबित है। साथ ही प्रो. अंसारी की प्रोफेसर पद पर नियुक्ति की पात्रता से जुड़ा मामला भी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पास लंबित होने की बात कही है। प्रो. रचना कौशल ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबित शिकायतों और जांचों पर जवाबदेही तय किए बिना प्रॉक्टर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना उचित नहीं है।

सात महीने में प्रॉक्टर को हटाया
1949 के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रॉक्टर रहने का रिकॉर्ड प्रो. मोहम्मद वसीम अली के नाम रहा है। वह छह साल तक प्रॉक्टर रहे हैं। जेन-जी के आंदोलन के दबाव में हटाए गए प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान सिर्फ सात महीने ही प्रॉक्टर पद पर रहे हैं।

सर सैयद की कब्र पर पढ़ी फातिहा
यूनिवर्सिटी की ओर से सभी मांगें माने जाने पर यासिर फहद सहित अन्य छात्रों के साथ सर सैयद की कब्र पर फातिहा पढ़ी। उनकी कब्र पर चादर चढ़ाई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें