नए प्रॉक्टर के सामने चुनौतियों का पहाड़
एएमयू में प्रॉक्टर की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी के सामने शुरुआत से ही कई चुनौतियां होंगी। छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना, परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और छात्र-प्रशासन के बीच भरोसा बहाल करना उनकी प्राथमिकता होगी। 19 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बाद बदले माहौल में प्रॉक्टर की भूमिका और भी अहम हो गई है। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चले आंदोलन में निलंबन, एफआईआर, भूख हड़ताल और छात्रों के विरोध ने यूनिवर्सिटी के माहौल को प्रभावित किया।
नए प्रॉक्टर की नियुक्ति पर सवाल
एएमयू में नवनियुक्त प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी की नियुक्ति पर सवाल उठे हैं। राजनीति विज्ञान विभाग की शिक्षिका प्रो. रचना कौशल ने उन पर सांप्रदायिक आधार पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच कुलपति के स्तर पर लंबित है। साथ ही प्रो. अंसारी की प्रोफेसर पद पर नियुक्ति की पात्रता से जुड़ा मामला भी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पास लंबित होने की बात कही है। प्रो. रचना कौशल ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबित शिकायतों और जांचों पर जवाबदेही तय किए बिना प्रॉक्टर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना उचित नहीं है।
सात महीने में प्रॉक्टर को हटाया
1949 के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रॉक्टर रहने का रिकॉर्ड प्रो. मोहम्मद वसीम अली के नाम रहा है। वह छह साल तक प्रॉक्टर रहे हैं। जेन-जी के आंदोलन के दबाव में हटाए गए प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान सिर्फ सात महीने ही प्रॉक्टर पद पर रहे हैं।
सर सैयद की कब्र पर पढ़ी फातिहा
यूनिवर्सिटी की ओर से सभी मांगें माने जाने पर यासिर फहद सहित अन्य छात्रों के साथ सर सैयद की कब्र पर फातिहा पढ़ी। उनकी कब्र पर चादर चढ़ाई।