मानसून की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र के किसान धान की रोपाई में व्यस्त हैं। वे बेहतर गुणवत्ता वाले धान की रोपाई कर रहे हैं, जिससे सीजन में अच्छी कमाई हो सके।
किसान सामान्यतः 15 से 20 मई के बीच धान की नर्सरी तैयार कर लेते हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में बड़े पैमाने पर रोपाई का कार्य शुरू हो जाता है। वर्तमान में अधिकांश गांवों में किसान परिवार और मजदूर खेतों में रोपाई में जुटे हुए हैं। क्षेत्र में 1509, पीबी-1, 1718, 1121, 1847, शरबती तथा सुगंध जैसी उच्च गुणवत्ता वाली धान की किस्में प्रमुख हैं। इन किस्मों को बाजार में सामान्यतः करीब 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल जाता है। इससे किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त होता है। गांव बामोती निवासी किसान दिनेश शर्मा ने बताया कि खैर क्षेत्र में लगभग 45 से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की जाती है।
मानसून और मंडी की चुनौतियां
किसानों के अनुसार, धान की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहती है। पर्याप्त वर्षा न होने पर किसानों को ट्यूबवेल और डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ जाती है। इस वर्ष मौसम विभाग ने सामान्य से अच्छी वर्षा का अनुमान जताया है। इसी उम्मीद में किसानों ने पिछले वर्ष की तुलना में कुछ अधिक क्षेत्रफल में धान की खेती की है, जिससे बेहतर उत्पादन की संभावना है। किसानों की निगाहें अब मानसून की सक्रियता और प्रशासन द्वारा मंडी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुधारने पर टिकी हैं, ताकि जाम की समस्या का समाधान हो सके।