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अलीगढ़: गांव में लंपी वायरस की एंट्री, गभाना में तीन केस आए, 1.40 लाख डोज से गोवंश का होगा घर-घर टीकाकरण

Mon, 07 Sep 2026 11:25 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

गोवंश में लंपी वायरस के चलते अलीगढ़ पशुपालन विभाग ने टीकाकरण की रफ्तार बढ़ा दी है। विभाग को 1.40 लाख डोज उपलब्ध हो चुकी हैं। पशुपालकों के घर-घर जाकर गोवंश का टीकाकरण कराया जा रहा है।
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गाय लंपी वायरस से पीड़ित - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गभाना क्षेत्र में लंपी वायरस के तीन केस सामने आए हैं। पशु चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि तीनों पशु अब स्वस्थ हैं। उधर पशु चिकित्सा विभाग ने सतर्कता बरतते हुए चंडौस, गभाना, इगलास और खैर ब्लॉक क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।

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चंडौस संवाददाता के अनुसार आठ हजार गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ललित कुमार ने बताया कि क्षेत्र में लंपी वायरस का कोई मामला नहीं है। गभाना में पशु चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि नौ हजार टीके मिले थे जिसमें पांच हजार गोवंश का टीकाकरण पूरा हो चुका है। 

इगलास संवाददाता के अनुसार मथुरा सीमा और हाथरस रोड से टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है। डिप्टी सीवीओ प्रभा कटियार ने बताया कि 10 हजार गोवंश को टीका लगाया गया है। खैर संवाददाता के अनुसार पशु चिकित्साधिकारी कैलाश राणा ने बताया कि टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है। सभी सरकारी और पंजीकृत गोशालाओं में शत-प्रतिशत टीकाकरण पूरा हो चुका है। कसीसो, सजना, फतेहगढ़ी, गौमत, किरतपुर, मऊ, बामोती, सुजानपुर, शिवाला और अहरोला टीकाकरण हो चुका है।

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बाहर से आने वाले गोवंश पर भी नजर
संक्रमण को जिले में प्रवेश करने से रोकने के लिए दूसरे जिलों से गोवंश की खरीद और आवागमन पर रोक लगाई गई है। पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य की निगरानी और टीकाकरण कर रही हैं। पशुपालकों से त्वचा पर गांठ, बुखार या अन्य असामान्य लक्षण दिखने पर तत्काल पशु चिकित्सक को सूचना देने की अपील की गई है।

1.40 लाख डोज से गोवंश का घर-घर टीकाकरण
गोवंश में लंपी वायरस के चलते अलीगढ़ पशुपालन विभाग ने टीकाकरण की रफ्तार बढ़ा दी है। विभाग को 1.40 लाख डोज उपलब्ध हो चुकी हैं। पशुपालकों के घर-घर जाकर गोवंश का टीकाकरण कराया जा रहा है। वहीं, 20 हजार अतिरिक्त डोज की मांग भी भेजी गई है।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि लंपी वायरस को लेकर पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी हवा के जरिए नहीं फैलती। संक्रमित गाय के छींकने, थूक या लार से दूसरी गाय में संक्रमण फैलने की बात सही नहीं है। एक साथ चारा खाने या पानी पीने से भी इसके फैलने का खतरा नहीं है।
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पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंच रहीं, 20 हजार और डोज मांगीं
मुख्य रूप से गायों का खून चूसने वाले कीड़ों, मक्खियों और मच्छरों के जरिये फैलता है। संक्रमित गाय के खून के संपर्क में आने से दूसरे गोवंश में संक्रमण पहुंच सकता है। इसलिए एक गाय को लगाए गए इंजेक्शन की सुई दूसरी गाय के लिए इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। सीवीओ के अनुसार, जर्सी नस्ल की गायों में लंपी का संक्रमण अधिक गंभीर और जानलेवा हो सकता है, जबकि भारतीय जेबू नस्ल में आमतौर पर इसके घातक होने की आशंका कम रहती है। ऐसे में पशुपालकों को गोवंश के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने की सलाह दी गई है।

ये बरतें सावधानी
डॉ. कैलाश राणा ने बताया कि खैर क्षेत्र में लंपी वायरस का कोई मामला नहीं है। पशुपालक और गोशाला संचालकों को बताया गया है कि किसी पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें अथवा आंख-नाक से पानी बहने जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल पशु चिकित्सालय में संपर्क करें। संदिग्ध अथवा बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग बांधें। बाड़े में मक्खी और मच्छरों को पनपने न दें क्योंकि ये वायरस फैलाने के मुख्य कारण हैं।
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