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डिफेंस कॉरिडोर: ब्रह्मोस-पृथ्वी मिसाइलों में लगेंगे अलीगढ़ में बने 100 से ज्यादा कलपुर्जे, प्रयास हुए तेज

Tue, 09 Dec 2025 01:22 PM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से 2023 में हुए करार के बाद डिफेंस कॉरिडोर की कंपनी दीप एक्सप्लो प्राइवेट लिमिटेड पिछले कई वर्ष से उपकरणों का निर्माण कर रही है, जो अलग अलग रक्षा उत्पादों में प्रयोग होते हैं।
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अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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डिफेंस कॉरिडोर अलीगढ़ नोड में रक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी अब भारत की सबसे उच्च मारक क्षमता वाली स्वदेशी मिसाइल ब्रह्मोस-पृथ्वी और अग्नि को 100 से ज्यादा कलपुर्जे बनाकर देगी। इसके लिए डीआरडीओ स्तर से आए डिजाइन पर काम करते हुए कंपनी प्रबंधन ने इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। डिजाइन के आधार पर नमूने बनाकर टीम को उन्हें पास कराने के लिए भेजा गया है। संकेत हैं कि इस माह में सहमति मिलने पर इनका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

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भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से 2023 में हुए करार के बाद डिफेंस कॉरिडोर की कंपनी दीप एक्सप्लो प्राइवेट लिमिटेड पिछले कई वर्ष से उपकरणों का निर्माण कर रही है, जो अलग अलग रक्षा उत्पादों में प्रयोग होते हैं। इसी क्रम में अब तक स्वदेशी निर्मित ब्रह्मोस, पृथ्वी और अग्नि मिसाइलों में लगने वाले कुछ कलपुर्जे यहां बन रहे थे। जिनमें मिसाइल को आगे बढ़ाने के मुख्य इग्निशन सिस्टम, प्लग जैसे आवश्यक उपकरण प्रमुख हैं। बेहद छोटे व अहम इन पुर्जों से मिसाइलें चलती हैं। इनके बिना मिसाइल का फटना तो दूर चलना भी संभव नहीं हो सकता है।

ब्रह्मोस व पृथ्वी के कलपुर्जों के नए डिजाइन पर हुआ काम
जेम पोर्टल पर ब्रह्मोस व पृथ्वी मिसाइलों के कलपुर्जों के नए डिजाइन अपलोड किए गए। जिन पर काम करते हुए कंपनी ने उनके नमूने बनाए हैं। उनके नमूने बनाकर टीम के साथ डीआरडीओ के पास भेजे गए हैं। साथ में एक टीम अधिकारियों से लगातार संपर्क में है। इसमें अब तक की बातचीत में सफलता के संकेत हैं। इस दिशा में अगर सफलता मिलती है तो ब्रह्मोस के करीब 80 व पृथ्वी के करीब 20 कलपुर्जे अलीगढ़ में बनना शुरू हो जाएंगे।
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हमारी कंपनी एक दर्जन प्रकार के ऐसे कलपुर्जे तैयार करती है। जो भारतीय व विदेशी मिसाइलों में प्रयोग होते हैं। अब तक हम 15 सेे 20 लाख की संख्या में कलपुर्जों की आपूर्ति भी कर चुके हैं। अब कुछ नए डिजाइन आए हैं, जिन पर हमने काम किया है। उन्हें बनाकर भेजा गया है। संकेत हैं कि जल्द सहमति मिलते ही उन्हें बनाना शुरू करेंगे। इस तरह 100 करीब कलपुर्जे हमारे यहां बनेंगे।-तरुण सक्सेना, निवेशक, डिफेंस कॉरिडोर

अब तक ये बन रहा
फाइटर प्लेनों में प्रयोग होने वाला स्मॉग व बुलट फ्लेयर। बोफोर्स, पृथ्वी, ब्रह्मोस मिसाइल-तोपों में प्रयोग होने वाले कई प्रकार के पिन, नॉब। फाइटन प्लेनों में सबसे आगे लगी होने वाली सिग्रल पिन व खाली ग्रेनेड सहित कई छोटे उत्पाद। डेटोनेटर, जिलेटिन डिस्पोज मशीनों से जुड़े कई उत्पाद बनते हैं।

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