मजबूत इरादे और कुछ नया करने की चाह ने मुनेश देवी को सफल मत्स्य पालक बना दिया। वह परंपरागत खेती को छोड़ मत्स्य पालन कर रही है। इससे वह 40 लाख प्रति वर्ष तक कमा रहीं। खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार दे रही हैं। इसके लिए उन्हें किसान सम्मान दिवस पर सम्मानित किया जा चुका है।
मुनेश देवी की शादी वर्ष 2012 में अकोला के खाल निवासी वेद व्रत सिंह से हुई थी। 12 वीं तक पढ़ी मुनेश किसी पत्रिका में मत्स्य पालन के लिए सरकारी अनुदान और अन्य खेती से अधिक मुनाफे के बारे में पढ़ा। इसके बाद पति वेदव्रत से चर्चा की। शुरुआत में परिजन नहीं माने लेकिन बाद में सभी राजी हो गए। इसके लिए खेत के छोटे से हिस्से में कच्चा तालाब बनाकर वर्ष 2021 में मत्स्य पालन शुरू किया।
शुरूआत में तमाम समस्या आई। उम्मीद के हिसाब से मुनाफा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दो साल बाद उन्हें साल में 20 लाख रुपये प्रति वर्ष का लाभ हुआ। इसके बाद तो उन्होंने डेढ़ हेक्टेयर का तालाब बनाकर वेस्टर्न कल्चर से मत्स्य पालन शुरू कर दिया। इससे उत्पादन 2 टन से बढ़कर 5 टन होने लगा है। साल में 40 लाख के करीब आमदनी हो रही है। इसके साथ ही वह चार अन्य ग्रामीणों को काम दे रही हैं। इस कामयाबी के श्रेय वह पति और ससुराल वालों को देती हैं।