शहरी क्षेत्र में निराश्रित, कमजोर व जरूरतमंद व्यक्तियों को ठंड से बचाने के लिए नगर आयुक्त ने सहायक व उप नगर आयुक्तों को रैन बसेरों की जिम्मेदारी दी है। इन अधिकारियों को शेल्टर होम की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया है। इनका जिम्मा रैन बसेरों में सुविधाओं की नियमित निगरानी और व्यवस्थाएं दुरुस्त कराना है।
कोहरे के बढ़ने के साथ ही पारा गिरना शुरू हो गया है। नगर आयुक्त ने इसी के बाद शहर में संचालित सभी रैन बसेरों में साफ-सफाई, गद्दे-रजाई, कंबल, स्वच्छ पेयजल, रसोई, अलाव, गर्म पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए।
नोडल अधिकारियों के रूप में इंजीनियरों को नियुक्त किया गया लेकिन तैयारी पूरी न होने पर आयुक्त ने अब सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम व श्रद्धा पांडेय, उप नगर आयुक्त सरिता सिंह और पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण को पर्यवेक्षक बनाया है। सभी पर्यवेक्षक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने नामित शेल्टर होम का निरीक्षण कर चेक लिस्ट के अनुसार व्यवस्थाएं पूर्ण कराते हुए रिपोर्ट अपर नगर आयुक्त को सौंपें।
खुले में न सोए कोई
नगर आयुक्त ने बताया कि प्रत्येक शेल्टर होम में तैनात केयर टेकर का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर शेल्टर होम के गेट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया है। लगातार बढ़ती सर्दी को देखते हुए नगर निगम ने हर रैन बसेरे में गैस हीटर की व्यवस्था की जा रही है। औचक निरीक्षण करने वाले अधिकारी अपनी टिप्पणी रजिस्टर में दर्ज करेंगे। प्रवर्तन टीमों व जोनल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, फुटपाथ और मुख्य बाजारों में कोई भी निराश्रित व्यक्ति खुले में न सोए।