लॉटरी के जरिये रकम दोगुनी करने का झांसा देकर 160 लोगों से 50 करोड़ से अधिक की ठगी के आरोपी आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-12 निवासी महेश कुमार वर्मा की 3.30 करोड़ की संपत्ति की कुर्क होगी। इस संबंध में कोर्ट ने सोमवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिए हैं। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएनएस) की धारा 107 के तहत यह पहली कार्रवाई होगी।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि भीम नगर, जगदीशपुरा निवासी मोहन बाबू ने पुलिस से शिकायत की थी। कहा था कि वर्ष 2000 में आरोपी महेश कुमार ने अपने साथियों के साथ मिलकर लाॅटरी में निवेश का लालच दिया था। उन्होंने रुपये जमा कर दिए। बाद में धोखाधड़ी का पता चला। इस तरह 160 लोगों से करोड़ों की रकम आरोपियों ने ले ली थी। वर्ष 2016 से आरोपियों ने लोगों के निवेश की रकम लौटाना बंद कर दिया। रकम मांगने पर आरोपी बहाने बनाकर टालते रहे। बाद में आरोपी धमकाने लगे।
शिकायत के आधार पर थाना हरीपर्वत में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना के लिए एसआईटी का गठन किया गया। विवेचना में सामने आया कि महेश कुमार सेक्टर-12 डी के मकान संख्या 565 का रहने वाला है। उसने लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रकम ली। इसके बाद अचल संपत्ति अर्जित की। वह लाॅटरी का ही कार्य करता था। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 9 प्राथमिकी और 5 सिविल वाद दर्ज किए गए।
रिटायर्ड एआरएम प्रवीण कुमार ने की पैरवी
डीसीपी सिटी ने बताया कि पीड़ितों में से एक रिटायर्ड एआरएम प्रवीण कुमार ने सभी पीड़ितों को साथ जोड़कर पैरवी शुरू की। इसके बाद पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के निर्देश पर डीसीपी अली अब्बास के निर्देशन में एसीपी हरीपर्वत अक्षय महाडिक के नेतृत्व में 10 सदस्यों की एसआईटी गठित की गई थी। नवंबर माह में पुलिस ने वादी मोहन बाबू के मुकदमे के आधार पर बीएनएनएस की धारा 107 के तहत महेश कुमार की संपत्ति जब्तीकरण के लिए कुर्की की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की थी।
इस पर कोर्ट में सुनवाई हुई। सोमवार को सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने आरोपी का जगदीशपुरा के बेर का नगला स्थित 30 लाख की कीमत का मकान, आवास विकास सेक्टर-4 में तीन करोड़ की अनुमानित कीमत का भूखंड और एक स्कूटी कुर्क करने का आदेश दिए दिया। अब पुलिस कार्रवाई करेगी।
भटक रहे पीड़ित, नहीं मिल रही रकम
थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक नीरज शर्मा ने बताया कि आरोपी की संपत्ति का रिकाॅर्ड निकाला गया था। साथ ही आयकर की जानकारी ली गई। दोनों तथ्यों को केस डायरी में शामिल किया गया। इसके बाद रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को दी गई। फिर रिपोर्ट कोर्ट में भेजी गई। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी की गई। इसमें साक्ष्य दिए गए कि आरोपी की आय कम है मगर अर्जित संपत्ति के बारे में जानकारी नहीं दे सका। आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिए। सोमवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए। वहीं पीड़ित अभी तक भटकने के लिए मजबूर हैं। किसी को भी ठगी की रकम नहीं दिलाई गई है।