फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एटा: इस दरगाह पर चढ़ने वाले लाखों रुपये के दान का लेखाजोखा रखेगा प्रशासन, 11 साल पहले विस में भी गूंजा था मुद्दा

Sun, 10 Apr 2022 06:21 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

तत्कालीन स्थानीय विधायक ने 11 साल पहले  दरगाह पर प्रशासक नियुक्त करने की मांग उठाई थी। विगत दिवस से यहां जात शुरू हो गई। इस दौरान यहां आने वाले लाखों रुपये के दान का लेखा-जोखा रखने के लिए  तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया गया है।
Register For Event
विज्ञापन
बड़े मियां-छोटे मियां की दरगाह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बड़े मियां-छोटे मियां की दरगाह और जात की शिकायतों से उठा मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। दरगाह स्थल को प्रशासन अपने कब्जे में ले चुका है। दरगाह संबंधी मुद्दा 11 साल पहले उप्र की विधानसभा में भी गूंज चुका है। तत्कालीन स्थानीय विधायक कुबेर सिंह अगरिया ने प्रशासक नियुक्त करने की मांग उठाई थी। हालांकि जिलाधिकारी की सहमति के बावजूद इस संबंध में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

विज्ञापन


उस समय जलेसर से विधायक रहे कुबेर सिंह अगरिया ने 17 फरवरी 2011 को विधानसभा में मामला उठाया था। कहा कि बुधवार व शनिवार को हिंदुओं द्वारा जात की जाती है। ज्येष्ठ माह के इन दिनों में करोड़ों रुपये प्रतिदिन का चढ़ावा आता है। इसके अलावा भी हर शनिवार और बुधवार को हजारों रुपये का चढ़ावा आता है। इस चढ़ावे की धनराशि और सामग्री को स्थानीय दबंग व अराजक तत्व अपने कब्जे में कर लेते हैं, जिससे चढ़ावे के धन का दुरुपयोग हो रहा है। 

इस चढ़ावे को लेकर स्थानीय गुंडों में कई बार संघर्ष हो चुका है, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति कभी भी खराब हो सकती है। इस चढ़ावे को अराजक तत्वों के हाथ जाने से रोकने के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया जाए। चढ़ावा की पूरी धनराशि को राजकोष में जमा कराया जाए। विस में मामला उठते ही उसी दिन तहसीलदार ने एसडीएम जलेसर और एसडीएम ने डीएम को अपनी रिपोर्ट भेज दी। 
विज्ञापन


इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम डॉ. बलकार सिंह ने अगले ही दिन 18 फरवरी को उप सचिव गृह विभाग उप्र को पत्र भेजा। जिसमें उन्होंने मजार पर अन्य बड़े धार्मिक स्थलों की तरह प्रशासक या न्यास बनाकर प्रबंधन में दिए जाने की संस्तुति कर दी, लेकिन पूर्व की सरकारी में डीएम की संस्तुति के बावजूद इस पर अमल नहीं किया गया। जिसके चलते जात के दौरान आने वाले चढ़ावे का मनमाना बंटवारा होता रहा।

एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि कुछ दिन पहले आई शिकायतों के आधार पर चुनाव से पहले जांच शुरू कराई गई थी। दरगाह की जो प्रबंध समिति बनी हुई थी, उसे नोटिस जारी किए गए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। जिसके बाद दरगाह के ताले तोड़कर कब्जा ले लिया गया है। तहसीलदार को रिसीवर बनाकर जात कराई जा रही है। चढ़ावे में आने वाली धनराशि को दरगाह के बैंक खाते में जमा कराया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें