दिवाली के लिए घरों में रंगाई-पुताई और सफाई कार्य शुरू हो गया है। सफाई के दाैरान उड़ने वाले धूल के कणों से अस्थमा मरीजों की सांस फूल रही है। इन्हें सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न होने लगी है। मर्ज बढ़ने पर मरीज एसएन मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। बीते एक सप्ताह में वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में 15 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि अस्थमा की परेशानी बढ़ने की तीन वजह हैं। पहली घरों में रंगाई-पुताई और सफाई हो रही है। दूसरी वजह नवरात्र और दिवाली के लिए खरीदारी बढ़ी है, जिससे बाजारों में वाहनों का आवागमन बढ़ गया है। इससे धुआं की मात्रा भी बढ़ रही है। तीसरी वजह बदलता माैसम है। सुबह और शाम को तापमान कम और दिन में अधिक है। ऐसे में हवा में धूल-धुआं के अतिसूक्ष्म कण सांस नली में पहुंचकर संक्रमण का कारण बन रहे हैं। नलिकाएं संकुचित होने से सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
ऐसे मरीज जिन्होंने दवाएं बंद कर दी थीं, उनके सीने में जकड़न, सांस फूलना, जुकाम, गले में खराश और एलर्जी की दिक्कत और बढ़ गई। सोमवार को ओपीडी में 286 मरीज आए, इनमें से 40 ऐसे मरीज रहे, जिनको अस्थमा की परेशानी बढ़ गई है। मेडिसिन विभाग के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि मौसम बदलने और प्रदूषण बढ़ने से सांस रोगी और वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। इसमें बुखार-खांसी के साथ शरीर में दर्द, कमजोरी, थकान और गला खराब होने की शिकायत मिल रही है। इलाज से बुखार ठीक होने के बाद खांसी को सही होने में समय लग रहा है।
इन बातों का रखें ध्यान:
- अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनकर साफ-सफाई करें।
-रंगाई-पुताई वाले कमरे में रात में न सोएं।
- डॉक्टर की सलाह पर इन्हेलर शुरू करें।
- दवाएं बंद न करें, परेशानी पर डॉक्टर को दिखाएं।
- सुबह-शाम भाप ले सकते हैं।
पर्चे और जांच के लिए लाइन में लगकर हुए परेशान
सोमवार को एसएन की ओपीडी में 3408 मरीज आए। इससे हॉल ठसाठस भर गया। पर्चे, दवा और खून की जांच के लिए मरीजों को दो-तीन घंटे लाइन में लगना पड़ा। धक्कामुक्की भी झेलनी पड़ी। इससे बुजुर्ग मरीज परेशान हो गए और जमीन पर बैठ गए। प्राचार्य डाॅ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन में इलाज की सेवाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। इससे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सोमवार को मरीजों की भीड़ अधिक रहती है। ऑनलाइन पर्चे भी बनवाए गए।