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Sawan Purnima 2026: कब है सावन पूर्णिमा 28 या 29 अगस्त ? जानिए तिथि, दान-स्नान और धार्मिक महत्व

Wed, 19 Aug 2026 08:17 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Purnima 2026: हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर दान, स्नान और पूजा करने का विशेष महत्व होता है। 
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सावन पूर्णिमा व्रत का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sawan Purnima 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है और इस माह में पड़ने वाली पूर्णिमा का भी खास महत्व होता है। सावन माह की पूर्णिमा तिथि  पर भगवान शिव की पूजा-आराधना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। सावन पूर्णिमा पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने, बेलपत्र अर्पित करने और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के आपसी रिश्ते और प्यार का पर्व रक्षाबंधन भी मनाया जाता है। इस वर्ष सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं तिथि, दान-स्नान का शुभ मुहूर्त। 
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सावन पूर्णिमा तिथि 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से शुरू हो रही है, जो 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के हिसाब से सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को है। 

पूजा, स्नान और दान का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि पर गंगास्नान और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त में सुबह 04 बजकर 28 मिनट से लेकर 05 जबकर 12 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं सावन पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का भी खास महत्व होता है। 
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सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व 
सावन पूर्णिमा की तिथि पर भगवान शिव और माता पार्तती की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है। इस दिन व्रत रखते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करने का महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करने की पंरपरा है।  श्रावण पूर्णिमा पर दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करना बहुत ही पुण्यकारी होता है। दान देने से न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि दाता के जीवन में भी सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है। विशेष रूप से इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्षिणा देना बहुत शुभ माना जाता है। श्रावण पूर्णिमा पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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