क्यों मनाते हैं रविदास जयंती?
रविदास जयंती संत गुरु रविदास जी के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में संवत 1337 ईस्वी में माघ महीने की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसी वजह से हर साल माघ पूर्णिमा को उनकी जयंती मनाने की परंपरा चली आ रही है। गुरु रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों से समाज को यह सिखाया कि सभी इंसान बराबर हैं और भक्ति का रास्ता प्रेम व करुणा से होकर जाता है।
वाराणसी में रविदास जयंती का खास महत्व है और यहां यह पर्व बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस अवसर पर दूर-दूर से श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। गुरु रविदास जी की तस्वीरों के साथ शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, मंदिरों में आरती होती है और उनके भजनों व पदों का गायन किया जाता है। यह दिन श्रद्धा, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
रविदास आरती
नामु तेरो आरती भजनु मुरारे, हरि के नाम बिनु गणपति सगल पसारे।
नाम तेरा सारनो नाम तेरा उर्सा, नामु तेरा केसरो ले चितकारो।
नाम तेरा अन्भुला नाम तेरा चंदनोघसि, जपे नाम ले तुहि कू चारे।
नाम तेरा दिवा नाम तेरो, नाम तेरो तेल बात ले माही पसारे।
नाम तेरे की ज्योति जगाई, भीलो उजिरो भवन सगलारे।
नाम तेरो तगा नाम फूल माला, भार चौथा सगल जूठारे।
तेरो कियो तू ही किया अरपौ, नाम तेरो तुही चंवर ढोलारे।दस अथा अट्ठेस चारे खानी, इहै वरतनि है सगल संसारे।
कहै 'रविदास' नाम तेरो आरती, सतिनाम है हरिभोगे।
संत रविदास के अनमोल वचन
- फोटो : amar ujala
संत रविदास के अनमोल वचन
- फोटो : amar ujala
कर्म करना हमारा धर्म है, फल पाना हमारा सौभाग्य है
भगवान उस हृदय में निवास करते हैं
जिसके मन में किसी के प्रति बैर भाव नहीं है, कोई लालच या द्वेष नहीं है।
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