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गुरु गोबिंद सिंह जयंती कब? जानें उनके प्रेरक वचन और इतिहास

Fri, 28 Nov 2025 10:03 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Guru Gobind Singh Jayanti: गुरु गोविंद सिंह जी की वीरता, त्याग और आध्यात्मिक नेतृत्व को समर्पित जयंती देशभर में श्रद्धा से मनाई जाती है। जानें गुरु जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना, उनके उपदेश और सिख इतिहास में उनके योगदान के बारे में।
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गुरु गोबिंद सिंह जयंती - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Guru Gobind Singh Jayanti Date: गुरु गोविंद सिंह जी सिख इतिहास के ऐसे महान नेता और आध्यात्मिक योद्धा थे, जिनकी वीरता, त्याग और धर्म के प्रति समर्पण की मिसाल अद्वितीय है। उनकी जयंती सिख समुदाय सहित पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। यह दिन उनके अद्भुत साहस, प्रेरणादायी जीवन और समाज को दिए गए अमूल्य मार्गदर्शन को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है।

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केवल नौ वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभालने के बाद गुरु गोविंद सिंह जी ने न सिर्फ सिख पंथ को नई दिशा दी, बल्कि 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर समाज में समानता, न्याय और धर्म की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब को ही अपना शाश्वत गुरु मानने का उपदेश दिया, जो आज भी सिख धर्म की आधारशिला है। 
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गुरु गोविंद सिंह द्वारा बताए गए 5 ककार

गुरु गोविंद सिंह द्वारा बताए गए 5 ककार
गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना करते समय सिखों के लिए पाँच ककार अनिवार्य किए। ये 5 प्रतीक – केश, कंघा, कृपाण, कच्छ और कड़ा – न सिर्फ सिख पहचान का हिस्सा हैं, बल्कि अनुशासन, साहस और शुद्धता का प्रतीक भी माने जाते हैं।

गुरु गोविंद सिंह जी की प्रमुख शिक्षाएं
गुरु गोविंद सिंह जी की प्रमुख शिक्षाएं 
  • धरम दी किरत करनी: जीवन में हमेशा धर्मपूर्वक और ईमानदारी से आजीविका कमानी चाहिए।
  • दसवंड देना: अपनी कमाई का दसवां हिस्सा सेवा या दान के रूप में समाज की भलाई के लिए देना चाहिए।
  • कम करन विच दरीदार नहीं करना: हर काम पूरी निष्ठा और मेहनत से करना चाहिए, लापरवाही या आलस्य से बचना चाहिए।
  • अभिमान नहीं करना: अपनी जाति, धन, युवा अवस्था या कुल-परिवार पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  • गुरुबानी कंठ करनी: गुरुबानी का अध्ययन और स्मरण करना सिख जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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धर्मगुरु होकर भी शस्त्र क्यों उठाए?
धर्मगुरु होकर भी शस्त्र क्यों उठाए?
गुरु गोविंद सिंह जी एक महान आध्यात्मिक नेता थे, लेकिन सत्य, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने शस्त्र धारण किए। बचपन से ही वे मार्शल आर्ट और तलवारबाज़ी में निपुण थे। अपने जीवन में उन्होंने मुगलों और अत्याचारियों के विरुद्ध लगभग 14 युद्ध लड़े, ताकि समाज में अन्याय और अत्याचार का अंत हो सके। इसी कारण वे "संत सिपाही" के नाम से भी प्रसिद्ध हैं—जो आध्यात्मिकता और वीरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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