सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल नारकंडा में बढ़ेगा पर्यटन कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला शिमला को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए तैयार किए नारकंडा-हाटू पीक रोपवे प्रोजेक्ट के अब सिरे चढ़ने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट को सरकार पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर नहीं अपने आप पूरा कर संचालित करने की दिशा में काम कर रही है।
358.42 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को अब नाबार्ड से फंडिंग करवाकर इसका निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। राज्य के रोपवे एंड रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने विधायक प्राथमिकता की बैठक में ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर द्वारा सुझाए विकल्प के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के आदेशों पर प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के बाद इसे मंजूरी के लिए प्लानिंग सलाहकार को भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार स्वयं इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू करेगी। इससे एक ओर जहां प्रदेश के हित सुरक्षित रहेंगे वहीं इससे सुप्रसिद्ध पर्यटक स्थल नारकंडा का पर्यटन कारोबार भी बढ़ेगा।
विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने प्रोजेक्ट को विधायक प्राथमिकता में शामिल कर इसे नाबार्ड से फंडिंग उपलब्ध करवाने को हरी झंडी देने पर मुख्यमंत्री सुक्खू का आभार व्यक्त किया। नाबार्ड से फंडिंग को मंजूरी के लिए अब आवश्यक प्रक्रिया और शर्तों को पूरा किया जाएगा। राठौर ने कहा कि रोपवे एंड रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा तैयार की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को कार्पोरेशन के निदेशक इंजीनियर अजय शर्मा ने एडवाइजर प्लानिंग को इसके लिए 2026-27 में ही मंजूरी दिलवाने को प्रस्ताव भेजा है। इससे नारकंडा में पर्यटन कारोबार को गति मिलेगी। नारकंडा पहले से स्कीईंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान रखता है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जा रहा है। इसका कार्य प्रगति पर है। सरकार के इस रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य स्वयं किये जाने से हाटू माता मंदिर की धार्मिक मान्यता और देव परंपरा भी सुरक्षित रहेगी। इससे परियोजना क्षेत्र में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
पूर्व सरकार के कार्यकाल से लटका है प्रोजेक्ट
पूर्व में रही प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस परियोजना का निर्माण पीपीपी मोड पर करवाने का फैसला लिया था। इसके दो से तीन बार टेंडर भी कॉल किए गए थे। बावजूद इसके कोई भी निजी फर्म प्रोजेक्ट निर्माण के लिए आगे नहीं आई। इस पर प्रदेश की मौजूदा सरकार ने फरवरी 2025 में इसे विधायक प्राथमिकता में डाल कर इसको नाबार्ड से फंड की व्यवस्था करने का फैसला लिया था।