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प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय संतुलन जरूरी : कुलपति

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जैव-विज्ञान विभाग का सम्मेलन का शुभारंभ
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जलवायु परिवर्तन चुनौतियां का समाधान अनुसंधान से संभव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है।
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कुलपति ने कहा कि विश्व आज ऊर्जा संकट, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। इन समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान और हरित ऊर्जा के माध्यम से ही संभव है। प्रो. महावीर विश्वविद्यालय में जैव-विज्ञान विभाग के वीरवार शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सस्टेनेबल फ्यूचर और रेजिलिएंट में बोल रहे थे। सम्मेलन में देशभर से आठ राज्यों के 200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। यह सम्मेलन सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनो टेक्नोलॉजी के सहयोग से आयोजित किया है। सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करना है। सम्मेलन में प्रो. आरसी सोबती, प्रो. आरपी टंडन, प्रो. बीके शिवराम, प्रो. एनएस नेगी और प्रो. डीआर ठाकुर भी मौजूद रहे। उन्होंने विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका पर बल दिया जो सतत वैज्ञानिक प्रथाओं को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता विकसित करने में अहम है। आयोजन सचिव डॉ. राजेश जरयाल ने बताया कि सम्मेलन में तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और पैनल चर्चाओं के माध्यम से सतत भविष्य और सुदृढ़ पृथ्वी के निर्माण पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
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