साइबर क्राइम सेल अब वेबसाइटों से वीडियो हटाने की प्रक्रिया में जुटा है। पुलिस के अनुसार, कई युवतियों को महीनों या वर्षों बाद पता चलता है कि लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान साझा किए उनके निजी वीडियो दूसरी वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। इसकी जानकारी मिलने पर उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में युवतियों को परिचितों और अन्य लोगों से वीडियो के सार्वजनिक होने की जानकारी मिली। लाइव स्ट्रीमिंग एप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कमाई के लिए लाइव आने वाले युवाओं के वीडियो दूसरे मोबाइल से रिकॉर्ड किए जा सकते हैं।
कई एप पर प्रसारण के दौरान रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं होने के बावजूद स्क्रीन पर चल रहे वीडियो को बाहरी डिवाइस से रिकॉर्ड करना संभव है। इसके बाद इन वीडियो को अलग-अलग वेबसाइट पर अपलोड या प्रसारित किया जा सकता है।
शिकायतों की पुलिस जांच कर रही है। संबंधित वेबसाइटों से वीडियो हटाने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। लाइव स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय निजता का ध्यान रखें। ऑनलाइन साझा की सामग्री की रिकॉर्डिंग कर उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। -अमित यादव, एसपी साइबर क्राइम