इन घड़ियों की खासियत यह है कि तीनों घड़ियां एक साथ चलती हैं। रिज मैदान पर रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। स्थानीय लोग और सैलानी क्राइस्ट चर्च देखने भी जाते हैं, लेकिन बंद पड़ी घड़ियों को देखकर उन्हें निराशा होती है। इन घड़ियों को कई बार ठीक करवाया जा चुका है, लेकिन कुछ समय बाद फिर खराब हो जाती हैं। दो दिन पहले भी घड़ियों की मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन एक दिन बाद ही दोबारा बंद हो गईं। चर्च की पादरी डॉ. विनिता रॉय ने बताया कि घड़ियों को कई बार ठीक करवाया है, लेकिन बार-बार खराब होने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
चर्च के ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। चर्च में लगी पांच बड़ी खिड़कियां भी इसकी विशेष पहचान हैं। यह कीमती कांच से बनी हैं और ईसाई धर्म के विश्वास, उम्मीद, परोपकार, धैर्य और विनम्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। इनमें से एक खिड़की का कांच थोड़ा टूट गया है। वर्ष 2014 में चोरों ने इसी कांच को तोड़कर चर्च में घुसने का प्रयास किया था। इसके बाद से अब तक टूटे हुए कांच की मरम्मत नहीं हो पाई है।
शिमला के क्राइस्ट चर्च में 125 वर्ष पुराना पाइप ऑर्गन भी मौजूद है, जो एक ऐतिहासिक संगीत उपकरण है। इसे वर्ष 1899 में इंग्लैंड से यहां लाया था। इसे किंग ऑफ ऑर्गन कहा जाता है। यह तीन मंजिलों जितना बड़ा है और इसे बजाने के लिए इसके अंदर प्रवेश करना पड़ता है। इसके प्रत्येक हिस्से से अलग-अलग प्रकार की धुन और आवाज निकलती है।