जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कर्मचारी ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत की जानकारी विभाग को नहीं दी, इससे उसने सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया। विभागीय जांच में दोनों आरोप सिद्ध पाए गए। जांच के दौरान कर्मचारी अपने बैंक खाते में जमा बड़ी धनराशि के स्रोत का भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। विभाग ने इसे भी उसके विरुद्ध प्रतिकूल माना। हालांकि, कर्मचारी ने अपने जवाब में कहा कि उसे हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है और आपराधिक मामले का ट्रायल अभी लंबित है तथा किसी अदालत ने उसे दोषी नहीं ठहराया है।
उपनिदेशक यशवीर धीमान ने आदेश में स्पष्ट किया कि आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच दोनों की प्रकृति अलग-अलग होती है। विभागीय जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर्मचारी का आचरण सेवा नियमों के विपरीत पाया गया। राज्य सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना जनहित और विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रतिकूल है। इन्हीं आधारों पर महेश्वर सिंह को तत्काल प्रभाव से सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।