पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शनिवार को कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सदन में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज को पुरुषों की बच्चेदानी का ऑपरेशन बता दिया। मुख्यमंत्री को उनके सलाहकार गलत सूचनाएं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री को सिर्फ इसलिए हिमकेयर योजना बंद नहीं करनी चाहिए कि इसे भाजपा सरकार के समय में शुरू किया गया था।
मुख्यमंत्री ने जिन मामलों का हवाला दिया है, वह कैंसर के मरीजों के इलाज से जुड़ा है। जहां पर कोई ऑपरेशन नहीं हुआ, सिर्फ उन्हें कैंसर में इस्तेमाल होने वाले कीमोथेरेपी का कांबिनेशन दिया गया है। हिमकेयर के पैकेज में सीटी फॉर सीए ओवरी के तहत इलाज किया गया। सभी एक दुर्लभ कैंसर से ग्रस्त थे, जिसका कोई सटीक इलाज पद्धति निर्धारित नहीं है। इसलिए इस बीमारी का हिमकेयर में कोई स्पष्ट पैकेज नहीं था।
चार मरीजों के दुर्लभ कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर द्वारा हिमकेयर में उपलब्ध पैकेज का इस्तेमाल किया गया। जयराम ने कहा कि मुख्यमंत्री जिन पुरुषों के बच्चेदानी निकालने का जिक्र कर रहे हैं। उन चार कैंसर पीड़ितों में एक 71 साल के बुजुर्ग और एक 12 साल का बच्चा भी है। दो अन्य पुरुष 50 और 37 साल के हैं। हिमकेयर के पैकेज के ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल सीटी फॉर सीए ओवरी में जिस दवा का इस्तेमाल होता है, उसका नाम लाइपो डॉक्स और कार्बोप्लैटिन है, इसके कई डोज मरीज को लगाने पड़ते हैं।
जयराम ने कोविड काल में लगाए गए वार्ड ब्वाय और फार्मासिस्ट को नौकरी से निकालने, आईजीएमसी के ट्रामा सेंटर का सिर्फ अपने नाम की पट्टिका लगाने के लिए दोबारा उद्घाटन करवाने का मामला उठाया। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि कोविड काल में सेवाएं देने वालों का सरकार ख्याल रखेगी।
भाभी जी के हलके में सर्जन है, ओटीए नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने सीएम की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र का मामला उठाते हुए कहा कि देहरा अस्पताल में 2022 से सर्जन तो हैं लेकिन ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट नहीं है। जिस कारण यहां ऑपरेशन नहीं हो रहे और केस टांडा भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सदन में तो होते नहीं, भाभी जी आप उन्हें बता देना।
मेरे जोश को विद्यार्थी जीवन से जोड़ते हैं...
सीएम सुक्खू बोले-जयराम हमेशा तोड़-मरोड़कर तथ्य पेश करते हैं। यह मेरे जोश को विद्यार्थी जीवन से जोड़ते हैं। वह धन्यवाद करते हैं। इनकी सरकार शाम को फैसला लेती थी और दूसरे दिन बदल देती थी। लगता है कि इनमें एबीवीपी वाला जोश आ गया है।