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Himachal Weather: अंधड़, बारिश-ओलावृष्टि से फसलें तबाह, मलबे में दबे तीन वाहन; इतने दिन बरसेंगे बादल

Tue, 05 May 2026 04:02 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

मंगलवार दोपहर राजधानी शिमला व कई अन्य भागों में भारी बारिश दर्ज की गई। 
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हिमाचल में भारी बारिश-ओलावृष्टि, चोटियों पर बर्फबारी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल में तीसरे दिन भी कई क्षेत्रों में बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि का दौर जारी रहा। राजधानी शिमला में मंगलवार दोपहर बाद झमाझम बादल बरसे। शहर में तीन से चार बजे के दौरान 18 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। भारी बारिश से शहर की कई सड़कों में मलबा जमा होने से जलभराव की स्थिति बनी रही। कुफरी, मशोबरा, करसोग, राजगढ़ में भारी ओलावृष्टि से सड़कें और बगीचे सफेद हो गए। धौलाकुआं, पांवटा साहिब में अंधड़ चला। रोहतांग सहित किन्नौर कैलाश की चोटियों पर मंगलवार को हल्की बर्फबारी हुई। ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर में मंगलवार को धूप खिली रही। 

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करसोग क्षेत्र में ओलावृष्टि का कहर
करसोग क्षेत्र के पांगणा, मसोग और सुईं-कुफरीधार में मंगलवार दोपहर बाद ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को सफेद चादर से ढक दिया। किसानों और बागवानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। सेब, बादाम, खुमानी, प्लम और आड़ू के पेड़ों पर लगे फल जमीन पर गिर गए, जबकि मटर और फ्रासबीन की फसलें भी नष्ट हो गईं। वहीं पत्तेदार सब्जियां भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। 
 

 गाड़ी व दो बाइक मलबे की चपेट में आ गए
वहीं सिरमौर में बारिश-ओलावृष्टि से नकदी फसलों व फलदार पौधों को नुकसान पहुंचा है। धौलाकुआं, पांवटा साहिब क्षेत्र में तूफान के चलते बिजली बोर्ड को लाखों का नुकसान हुआ है। राजगढ़ में भारी ओलावृष्टि हुई। इसके चलते लहसुन, टमाटर, मटर और फ्रासबीन और लहसुन की फसलों को नुकसान हुआ है। सिरमौर में बिजली के 53 पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं। संगड़ाह-रेणुकाजी सड़क पर बारिश से भारी मलबा सड़क पर आने से एक कार और दो बाइक दब गए। कार में भारतीय सेना में तैनात जवान विनोद कुमार और परिवार के तीन सदस्य सवार थे। मलबा गिरने से विनोद के बेटे को हल्की चोटें आई हैं।

कहां कितना न्यूनतम तापमान
कांगड़ा जिला में सुबह व शाम के समय बारिश हुई। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई।  सोमवार रात को शिमला में न्यूनतम तापमान 11.0, सुंदरनगर में 15.0, भुंतर में 11.1, कल्पा में 2.6, धर्मशाला में 17.0, ऊना में 17.5, नाहन में 14.6, केलांग में 4.4, सोलन में 11.4, मनाली में 6.6, कांगड़ा में14.6, मंडी में 15.4, बिलासपुर में 18.0, चंबा में 16.2, कुकुमसेरी में 2.9 और पांवटा साहिब में 21.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

इतने दिन खराब रहेगा माैसम
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 5, 10 और 11 मई को राज्य के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश-बर्फबारी होने के आसार हैं। 6 और 7 मई को राज्य के अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश-बर्फबारी होने की संभावना है। 8 और 9 मई को राज्य में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले 4-5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे 2-7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी। अगले 4-5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 3-10 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा। 
 

भूस्खलन से बंद रिकांगपिओ से काजा मार्ग 26 घंटे बाद हुआ बहाल
 रिकांगपिओ से काजा राष्ट्रीय राजमार्ग-505 मंगलवार शाम को 26 घंटों के बाद बहाल हुआ। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने मलिंग नाले के पास हाईवे के करीब 40 मीटर हिस्से से मलबे को कड़ी मशक्कत के बाद हटाया। मार्ग के बहाल होने जनजातीय क्षेत्र चांगों, शलखर, सुमरा, काजा, ताबो, स्पीति के लोगों और पर्यटकों ने राहत की सांस ली है। मार्ग के बंद रहने के दौरान कामकाज और जरूरी काम से स्पीति और रिकांगपिओ की ओर जाने वाले लोगों को मंगलवार को पहाड़ चढ़कर हाईवे के क्षतिग्रस्त हिस्से को पार करना पड़ा। सीमा सड़क संगठन ने मंगलवार सुबह मलबे को हटाने का काम शुरू किया, लेकिन लगातार पहाड़ से गिर रहे पत्थरों के कारण मशीनों को बार-बार हटाना पड़ा। शाम करीब 4:30 बजे बीआरओ की मशीनें मलबे को हटाकर हाईवे को बहाल करने में कामयाब हो पाईं। 

अधिकतम तापमान
ऊना 34.6
कांगड़ा 29.3
नाहन 27.9
मंडी 27.2
सोलन 26.0
धर्मशाला 25.0
शिमला 19.5
मनाली 17.2
कल्पा 16.9

 
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ऊना जिला में गेहूं की 20 फीसदी फसल तबाह
ऊना जिले में इस बार गेहूं की फसल पर मौसम की भारी पड़ी। अंधड़, बारिश और ओलावृष्टि के चलते करीब 20 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। हालात ये हैं कि कई स्थानों पर किसानों को मजबूरी में गीली फसल की ही थ्रैशिंग करवानी पड़ी। वहीं कई किसान ऐसे भी हैं, जो अभी भी फसल की थ्रैशिंग के लिए मौसम के साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
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