अध्ययन में पाया गया कि घोंसला बनाने वाले पेड़ों का औसत तना और घेरा करीब 255 सेंटीमीटर था। पेड़ की मोटाई, शाखाओं और पत्तियों का फैलाव और आसपास मौजूद दूसरे घोंसलों से दूरी गिद्धों के लिए महत्वपूर्ण कारक रहे। करीब 80 फीसदी घोंसले समुद्र तल से 600 से 800 मीटर की ऊंचाई के बीच मिले। शिमला ग्रामीण वन मंडल में हिमालयी गिद्धों की प्रजनन संख्या को लेकर अर्चि सहगल, रोहित चौधरी और शिवानी देवी ने अध्ययन किया है। ये तीनों शूलिनी विवि सोलन से हैं, जबकि इनके अध्ययन में सहयोग बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा के रोहित चौधरी ने किया है।
शोधपत्र 'हिमाचल प्रदेश के शिमला वन मंडल ग्रामीण में हिमालयी गिद्ध की प्रजनन आबादी का आकलन' में 21 प्रजनन स्थलों पर 69 घोंसले मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें 53 घोंसलों में बच्चे पाए गए। शोधकर्ताओं ने क्षेत्र में प्रजनन करने वाले हिमालयी गिद्धों की संख्या 138 आंकी।
जंगल की आग से खतरा
अध्ययन में जंगल की आग, चीड़ के पेड़ों से बिरोजा निकालने और पेड़ों की कटाई को गिद्धों के घोंसलों के लिए प्रमुख खतरा बताया गया है। शोधकर्ताओं ने बड़े और पुराने पेड़ों वाले जंगलों को बचाने, स्थानीय लोगों और वन विभाग के बीच जागरूकता बढ़ाने की सिफारिश की है। जंगल की आग से बचाव के विशेष उपाय करने की जरूरत भी बताई गई है।