हाईकोर्ट ने शिक्षकों को निलंबन मामले में स्पष्ट किया है कि सीसीएस (सीसीए) नियमों में यदि 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर जारी निलंबन आदेश की समीक्षा नहीं की गई, तो वह स्वतः अमान्य हो जाता है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों को निलंबन मामले में स्पष्ट किया है कि सीसीएस (सीसीए) नियमों में यदि 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर जारी निलंबन आदेश की समीक्षा नहीं की गई, तो वह स्वतः अमान्य हो जाता है। अदालत ने 91वें दिन समीक्षा कर निलंबन की अवधि बढ़ाने की सरकारी कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए तीनों याचिकाकर्ता शिक्षकों के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें 90 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद से सभी लाभों के साथ ड्यूटी पर माना जाए।
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गौरतलब है कि मार्च 2026 में पीएम श्री जीएसएसएस जवाली में बारहवीं कक्षा की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल करवाने के आरोप में तीन शिक्षकों को सस्पेंड किया गया था।सरकार ने अदालत को बताया कि निलंबन की समीक्षा की प्रक्रिया 6 जून 2026 को (90 दिनों के भीतर) शुरू की गई थी, लेकिन निलंबन विस्तार का अंतिम आदेश 12 जून 2026 को यानी 91वें दिन जारी हुआ। हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नियम 10 में 90 दिन के भीतर आदेश जारी होना अनिवार्य है। समय सीमा बीत जाने के बाद की गई समीक्षा या विस्तार किसी अमान्य आदेश को पुनर्जीवित नहीं कर सकता।