हिमाचल प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जटिलताओं से बचाने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच व्यवस्था को मजबूत किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे।
इन विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन हर महीने 9 और 27 तारीख को किया जाएगा। प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्षेत्रीय अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की शुरुआती स्तर पर पहचान कर समय रहते उपचार उपलब्ध करवाना है। यदि कोई गर्भवती महिला 9 तारीख को जांच नहीं करवा पाती है तो वह 27 तारीख को आयोजित होने वाले कैंप में स्वास्थ्य जांच करवा सकती है। इस व्यवस्था से ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं तक प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मुफ्त में होंगे जरूरी स्वास्थ्य टेस्ट
पीएमएसएमए के तहत आयोजित होने वाले कैंप में गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाएगी। इस दौरान ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन सहित विभिन्न आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाएंगी। जांच के माध्यम से एनीमिया, उच्च रक्तचाप, जेस्टेशनल डायबिटीज और गर्भावस्था से जुड़ी अन्य संभावित जटिलताओं का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।
किसी महिला में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के संकेत मिलने पर उसे आवश्यक उपचार और आगे की चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध करवाई जाएगी। जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां भी दी जाएंगी।
छह साल में छह गुना से ज्यादा बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में जांच के दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की पहचान में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में 2,496 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले सामने आए थे। इसके बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया और वर्ष 2025-26 में 15,320 तक पहुंच गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मामलों की संख्या बढ़ना जांच व्यवस्था के अधिक प्रभावी होने का भी संकेत है। ज्यादा महिलाओं की स्क्रीनिंग होने से गर्भावस्था में जोखिम की स्थिति का पहले पता लगाया जा रहा है, जिससे समय पर उपचार और निगरानी संभव हो रही है।