दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने पाया कि निजी प्रतिवादी के अनुभव प्रमाणपत्र पर लेबर ऑफिसर/लेबर इंस्पेक्टर के प्रति-हस्ताक्षर नहीं थे। आयोग ने 3 मार्च 2026 को सार्वजनिक नोटिस जारी कर निजी प्रतिवादी सहित अन्य उम्मीदवारों को 12 मार्च तक इस त्रुटि को सुधारने (प्रति-हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र जमा करने) का मौका दिया। त्रुटि दूर करने के बाद परिणाम घोषित हुआ। प्रतीक्षा सूची में निजी प्रतिवादी 71.50 अंकों के साथ पहले स्थान पर और याचिकाकर्ता समान अंक होने के बावजूद दूसरे स्थान पर रहा।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया कि अंतिम तिथि (26 मार्च 2024) बीत जाने के बाद आयोग निजी प्रतिवादी को अनुभव प्रमाणपत्र सत्यापित कराने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दे सकता था। कोर्ट ने पाया कि 5 दिसंबर 2022 के संशोधित भर्ती एवं पदोन्नति नियम में अनुभव प्रमाणपत्र को प्रति-हस्ताक्षरित कराने की कोई वैधानिक शर्त नहीं थी। यह शर्त केवल विज्ञापन की चेकलिस्ट के तहत एक सामान्य प्रक्रियात्मक निर्देश थी। उम्मीदवारों को चयन का मौलिक अधिकार भले ही न हो, लेकिन निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में विचार किए जाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। तकनीकी त्रुटियों या फॉर्मेट की कमियों के आधार पर उम्मीदवारी रद्द करना अनुचित है। जब तक कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न दी गई हो, मामूली चूक के लिए उम्मीदवार का चयन नहीं रोका जाना चाहिए।