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हिमाचल प्रदेश: कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया बदली, अब यूपीएससी पैटर्न अपनाएगी सरकार; जानें विस्तार से

Sun, 30 Aug 2026 10:38 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए डीपीसी के कामकाज में बदलाव किया है। अब विभागों को यूपीएससी के निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे और चेकलिस्ट आधारित प्रस्ताव भेजने होंगे। पूरे साल की रिक्तियों का प्रस्ताव एक साथ देना होगा। 1 जनवरी को पदोन्नति पात्रता की निर्णायक तारीख माना जाएगा। पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की भी समीक्षा होगी।
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हिमाचल प्रदेश सचिवालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में वर्षों से चली आ रही देरी, अधूरे प्रस्तावों और बढ़ती मुकदमेबाजी पर अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

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कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि अब सभी प्रशासनिक विभागों को डीपीसी प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार कर हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजने होंगे। प्रत्येक प्रस्ताव के साथ विस्तृत चेकलिस्ट संलग्न करना अनिवार्य होगा। राज्य लोक सेवा आयोग ने सरकार के समक्ष यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था कि कई विभाग डीपीसी प्रस्ताव तय कार्यक्रम के अनुसार नहीं भेज रहे हैं। बड़ी संख्या में प्रस्ताव अधूरे होते हैं, जिनमें आवश्यक दस्तावेजों, सेवा अभिलेखों और पात्रता संबंधी सूचनाओं का अभाव रहता है। ऐसे प्रस्तावों को आयोग बार-बार सुधार के लिए वापस भेजता है, लेकिन दोबारा प्रस्तुत करने पर भी कमियां बनी रहती हैं। 

इस स्थिति के कारण डीपीसी बैठकों के आयोजन में अनावश्यक विलंब होता है और पदोन्नति के पात्र कर्मचारी लंबे समय तक इंतजार करने को मजबूर होते हैं। नई व्यवस्था के तहत विभागों को पूरे कैलेंडर वर्ष की रिक्तियों का समेकित और पूर्ण प्रस्ताव एक साथ प्रस्तुत करना होगा। सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि अधिकारियों और कर्मचारियों के एपीएआर डोजियर समय पर पूर्ण और अद्यतन रखे जाएं ताकि डीपीसी के समय किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

कार्मिक विभाग ने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की व्यापक समीक्षा का भी निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार कई विभागों में आज भी 1980 और 1990 के दशक में बनाए गए नियम लागू हैं, जिनके अनेक प्रावधान वर्तमान प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गए हैं। सभी विभागों को   निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने आरएंडपी नियमों की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक संशोधन, सरलीकरण अथवा निरसन की प्रक्रिया शुरू करें।

अनुभाग से कम स्तर का अधिकारी नहीं करेगा प्रस्ताव जमा
डीपीसी प्रस्तावों को अब किसी कनिष्ठ अधिकारी या कर्मचारी के माध्यम से जमा नहीं किया जा सकेगा। प्रस्ताव केवल संबंधित प्रशासनिक विभाग के अनुभाग अधिकारी या उससे उच्च स्तर के अधिकारी की ओर से ही आयोग में प्रस्तुत किए जाएंगे। यदि प्रस्ताव निर्धारित चेकलिस्ट के अनुरूप नहीं पाया गया तो आयोग का अनुभाग अधिकारी उसे तत्काल वापस कर देगा।
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पहली जनवरी पात्रता तय करने की निर्णायक तिथि... पदोन्नति मामलों में सबसे बड़ी समस्या अधिकारियों की पात्रता तय करने की तारीख को लेकर सामने आ रही थी। अलग-अलग विभागों में अलग-अलग व्याख्याओं के कारण विवाद उत्पन्न होते थे। अब सरकार ने भारत सरकार के 8 मई 2017 के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप प्रत्येक रिक्ति वर्ष की 1 जनवरी को निर्णायक तिथि के रूप में स्वीकार करने का निर्णय लिया है। इसी आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन अधिकारी या कर्मचारी पदोन्नति के लिए पात्र है।
 
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