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आरएलए बिलासपुर फर्जीवाड़ा: बिलासपुर पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम, कब्जे में ले रही ब्लैकलिस्ट गाड़ियां

Sat, 16 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

फर्जी वाहन पंजीकरण और चोरी की लग्जरी गाड़ियों के नेटवर्क से जुड़े आरएलए बिलासपुर फर्जीवाड़े में जांच के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम पहुंच गई है। 
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आरएलए बिलासपुर फर्जीवाड़े की जांच करने पहुंची टीम। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 अंतरराज्यीय फर्जी वाहन पंजीकरण और चोरी की लग्जरी गाड़ियों के नेटवर्क से जुड़े आरएलए बिलासपुर फर्जीवाड़े में जांच के लिए दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम पहुंच गई है। टीम ने जांच आगे बढ़ाते हुए ब्लैक लिस्ट गाड़ियों को कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, क्राइम ब्रांच ने फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड गौरव को भी अपनी कस्टडी में लेकर अदालत से 19 मई तक रिमांड पर लिया है। इस पूरे फर्जीवाड़े में 1000 से ज्यादा गाड़ियों के गोलमाल का शक है। जांच में अब तक 44 गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सीधे से आरोपी सुभाष से जुड़े पाए गए हैं जबकि गौरव के नाम पर भी 45 गाड़ियों का रिकॉर्ड सामने आया है।

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क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी

सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि ये ब्लैक लिस्ट वाहन किन-किन माध्यमों से बाजार तक पहुंचे और किनकी भूमिका इनके सौदों में रही। टीम उन कार डीलरों, बिचौलियों और वाहन खरीदने वाले लोगों से भी पूछताछ कर रही है जिनके जरिये ये गाड़ियां ग्राहकों तक पहुंचीं। टीम का फोकस साक्ष्य जुटाने और नेटवर्क के हर लिंक को जोड़ने पर है। कई ऐसे नाम भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं जो सीधे तौर पर विभाग से जुड़े नहीं थे, लेकिन वाहन खरीद-फरोख्त-दस्तावेजी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता उन गाड़ियों को इकट्ठा करना है जिन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है या जिनका पंजीकरण धोखाधड़ी से कराया गया था।

आरएलए के कंप्यूटरों और एक्सेस लॉग की भी जांच

क्राइम ब्रांच की टीम आरएलए कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम, एक्सेस लॉग, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय लॉगिन गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। मामले में बिलासपुर आरएलए से पंजीकृत दो फॉर्च्यूनर और एसयूवी गाड़ियां पूरे नेटवर्क के खिलाफ सबसे अहम सुराग बनकर सामने आई थीं। गिरोह ने इन गाड़ियों को पूरी तरह वैध बताकर दिल्ली के ग्राहकों को बेचा था। बाद में जांच में सामने आया कि इनका पंजीकरण जाली दस्तावेजों और फर्जी डिजिटल एंट्री आधार पर किया था। 
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प्रदेश स्तरीय समिति पर उठने लगे सवाल

बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद अब तक किसी बड़े अधिकारी या प्रभावशाली तक जांच की आंच नहीं पहुंच पाई है। प्रदेश स्तर पर गठित जांच कमेटियां भी साढ़े चार माह बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी हैं। इससे जांच प्रक्रिया और उसकी गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। अब तक केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई होती दिख रही है, जबकि पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाली बड़ी कड़ियां अभी भी जांच से दूर हैं।
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