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विधानसभा सत्र: हिमाचल में भर्ती परीक्षा शुल्क कम नहीं करेगी सरकार, सीएम सुक्खू ने लिखित जवाब में किया स्पष्ट

Wed, 26 Aug 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 विधानसभा में धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान शुल्क संरचना कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के आयोजन पर होने वाले अतिरिक्त खर्चों को ध्यान में रखकर तय की गई है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू । - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल भर्ती परीक्षाओं के लिए लिए जा रहे परीक्षा शुल्क में कमी करने का उसका कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान शुल्क संरचना कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के आयोजन पर होने वाले अतिरिक्त खर्चों को ध्यान में रखकर तय की गई है।मुख्यमंत्री की ओर से सदन में दी गई जानकारी के अनुसार पूर्व में हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से ऑफलाइन (पेपर-पेन) मोड में आयोजित परीक्षाओं के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से 360 रुपये तथा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से 120 रुपये परीक्षा शुल्क लिया जाता था।

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बाद में भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और तकनीकी व्यवस्था लागू होने के बाद शुल्क संरचना में संशोधन किया गया। 14 मई 2025 को हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग को परीक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यय की पूर्ति के लिए शुल्क तय करने के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद आयोग की 7 अगस्त 2025 को हुई बैठक में परीक्षा शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया, जबकि कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) आयोजित करने के लिए चयनित एजेंसी पर आने वाले अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के उद्देश्य से 700 रुपये प्रसंस्करण शुल्क तय किया गया।

आयोग की सभी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से हो रहीं
वर्तमान में राज्य चयन आयोग की सभी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 30 मार्च 2024 के कार्यालय आदेश के तहत परीक्षा शुल्क 400 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया था। इसके बाद 31 मार्च 2026 को प्रदेश सरकार ने लोक सेवा आयोग को भी राज्य चयन आयोग की तर्ज पर अपनी शुल्क संरचना निर्धारित करने का अधिकार प्रदान कर दिया। परीक्षा शुल्क में वृद्धि को लेकर अभ्यर्थियों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में शुल्क कम करने का कोई विचार नहीं है। सरकार का तर्क है कि आधुनिक तकनीक आधारित भर्ती परीक्षाओं के संचालन, एजेंसियों के भुगतान और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसे देखते हुए वर्तमान शुल्क संरचना तय की गई है।
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ग्रामीणों का विरोध नहीं हुआ तो बढ़ाएंगे नगर परिषद नालागढ़ का दायरा
शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ग्रामीणों का विरोध नहीं हुआ तो नगर परिषद नालागढ़ का दायरा बढ़ाया जाएगा। विधायक हरदीप सिंह बावा ने कहा कि साल 2012 से 17 तक कांग्रेस सरकार के दौरान किरपालपुर, गागूवाल और राड़ीयाली के क्षेत्रों को नगर परिषद नालागढ़ में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया था। पूर्व की भाजपा सरकार ने इस पर कोई काम नहीं किया। नालागढ़ का अब बहुत अधिक विस्तार हो चुका है। नगर परिषद में नए क्षेत्र शामिल करने से सरकार की आय में भी बढ़ोतरी होगी। जवाब में शहरी विकास मंत्री ने कहा कि इस बाबत प्रस्ताव बनाकर उपायुक्त सोलन के माध्यम से विभाग को भेजा जाए। इस पर विचार किया जाएगा। 
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