हिमफेड के पास एनपीके का स्टॉप खत्म, खुले बाजार में यूरिया का गहराया संकट
विज्ञापन
सेब, स्टोन फ्रूट के अलावा अन्य फसलों के लिए बढ़ी खाद की मांग संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों और बागवानों को खाद के संकट का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक प्रयोग होने वाली एनपीके 12-32-16 खाद खत्म हो गई है। खुले बाजारों में किसानों को यूरिया खाद भी नहीं मिल रही है।
खाद की कमी के चलते बागवानों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि इन दिनों मक्की, सब्जियों और बागवानी फसलों सेब तथा स्टोन फ्रूट के लिए खाद की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है लेकिन सहकारी समितियों और निजी दुकानों में स्टॉक खत्म हो गया है। कई किसान खाद खरीदने के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं लेकिन कई उपनगरों में खुले बाजारों में किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल रही है। हिमफेड के अधिकारियों का दावा है जिले में यूरिया, एमओपी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। विभाग के अनुसार वर्तमान में करीब 300 मीट्रिक टन यूरिया और एमओपी खाद 500 मीट्रिक टन उपलब्ध है। हालांकि 12-32-16 खाद फिलहाल हिमफेड में भी उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन
अधिकारियों का कहना है कि इस खाद का प्रयोग मुख्य रूप से अगले महीने में बढ़ता है और जून तक इसकी सप्लाई उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। खाद उपलब्ध कराने वाली कंपनी इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक विशाल शर्मा ने कहा कि पश्चिमी देशों में चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस वजह से कुछ खादों में दिक्कत आ रही हैं। यूरिया, एमओपी, एसएसपी हिमफेड को उपलब्ध करवाई है। फिलहाल 12-32-16 खाद की उपलब्धता नहीं है। किसानों से अपील की कि बाजार में कई वैकल्पिक खादें उपलब्ध हैं। किसान उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।
कोट
हिमफेड के क्षेत्रीय प्रभारी साहिल डोगरा ने कहा कि हमारे पास यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। स्टोर में 300 मीट्रिक यूरिया उपलब्ध है। 12-32-16 भी जल्द उपलब्ध करवाया जाएगा।