दुकानें 99 साल के लिए लीज पर देने के फैसले का जताया विरोध, कर्मचारी-बोले खाली हो जाएगा नगर निगम का खजाना
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निगम प्रशासन ने कहा, पॉलिसी में होगा बदलाव, कई शर्तें बदलेंगी अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कारोबारियों को राहत देने के लिए तैयार की जा रही वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी पर विवाद हो गया है। नगर निगम के अपने कर्मचारी ही इस प्रस्ताव के विरोध में आ गए हैं। मजबूरन अब नगर निगम को इस पॉलिसी में बदलाव करने का फैसला लेना पड़ा है। अब निगम प्रशासन लीज की शर्तों में बदलाव करने जा रहा है।
नगर निगम के कर्मचारी सोमवार को आयुक्त सचिन कंवल से मिले और अपना मांगपत्र सौंपा। कर्मचारियों ने कहा कि इस प्रस्ताव से नगर निगम को नुकसान होगा। आय के ज्यादातर संसाधन पहले ही नगर निगम से छीने जा चुके हैं। अब यदि दुकानें भी 99 साल के लिए लीज पर दी गई तो इससे नुकसान होगा। शिमला शहर में नगर निगम की 1300 से ज्यादा दुकानें हैं। इनमें करीब चार सौ दुकानों की लीज को लेकर विवाद चल रहा है। वर्तमान में मौके पर दुकानें चला रहे कारोबारी नगर निगम से वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी लाकर राहत देने की मांग कर रहे हैं। इनकी एक बार महापौर सुरेंद्र चौहान से भी बैठक हो चुकी है। हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया है लेकिन इससे पहले ही विवाद शुरू हो गया है। आयुक्त ने कहा कि अभी प्रस्ताव तैयार हो रहा है। यदि कर्मचारी सुझाव देना चाहते हैं, तो उसे शामिल किया जाएगा। कर्मचारियों के अनुसार मंगलवार को इस मामले पर फिर से प्रशासन के साथ बैठक होगी।
घटाई जाएगी 99 साल की लीज अवधि नगर निगम कर्मचारियों के विरोध के बाद प्रशासन को 99 साल की लीज अवधि घटानी होगी। कर्मचारियों का कहना है कि इतने लंबे समय पर तक दुकानें लीज पर देना ठीक नहीं है। इसके अलावा दुकानों के किराए, सालाना बढ़ोतरी आदि को लेकर भी कर्मचारियों ने सुझाव दिए हैं। नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी का प्रस्ताव अभी फाइनल नहीं हुआ है। इस पर चर्चा चल रही है। 99 साल के लिए लीज पर देने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। कर्मचारी चाहें तो अपने सुझाव दे सकते हैं। इस पॉलिसी का मकसद सिर्फ निगम की आय बढ़ाना और कारोबारियों को राहत देना है।